1"और " सरदीस की कलीसिया के फरिश्ते को ये लिखा : "जो अपने दहने हाथ में सितारे लिए हुए है, और सोने के सातों चिरागदानो में फिरता है, वो ये फरमाया है कि|
2जागता रह, और उन चीज़ों को जो बाकी है और जो मिटने को थीं मज़बूत कर, क्यूँकि मैंने तेरे किसी काम को अपने खुदा के नज़दीक पूरा नहीं पाया |
3पस याद कर कि तू ने किस तरह ता'लीम पाई और सुनी थी, और उस पर कायम रह और तौबा कर | और अगर तू जागता न रहेगा तो मैं चोर की तरह आ जाऊँगा, और तुझे हरगिज़ मा'लूम न होगा कि किस वक्त तुझ पर आ पडूँगा |
4अलबत्ता, सरदीस में तेरे यहाँ थोड़े से ऐसे शख्स हैं जिहोने अपनी पोशाक आलूदा नहीं की | वो सफ़ेद पोशाक पहने हुए मेरे साथ सैर करेंगे, क्यूँकि वो इस लायक हैं |
5जो ग़ालिब आए उसे इसी तरह सफ़ेद पोशाक पहनाई जाएगी, और मैं उसका नाम किताब-ए-हयात से हरगिज़ न काटूँगा, बल्कि अपने बाप और उसके फरिश्तों के सामने उसके नाम का इकरार करूँगा |
6जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फरमाता है |
7"और फिलदिल्फिया की कलीसिया के फिरिश्ते को ये लिख : "जो कुद्दूस और बरहक़ है, और दाऊद की कुन्जी रखता है, जिसके खोले हुए को कोई बन्द नहीं करता और बन्द किए हुए को कोई खोलता नहीं, वो ये फ़रमाता है कि
8"मैं तेरे कामों को जानता हूँ (देख, मैंने तेरे सामने एक दरवाज़ा खोल रख्खा है, कोई उसे बन्द नहीं कर सकता) कि तुझ में थोड़ा सा ज़ोर है और तू ने मेरे कलाम पर "अमल किया और मेरे नाम का इन्कार नहीं किया |
9देख, मैं शैतान के उन जमा'त वालों को तेरे क़ाबू में कर दूँगा, जो अपने आपको यहूदी कहते हैं और है नहीं, बल्कि झूट बोलते हैं - देख, मैं ऐसा करूँगा कि वो आकर तेरे पावँ में सिज्दा करेंगे, और जानेंगे कि मुझे तुझ से मुहब्बत है |
10चूँकि तू ने मेरे सब्र के कलाम पर 'अमल किया है, इसलिए मैं भी आज़माइश के उस वक़्त तेरी हिफाज़त करूँगा जो ज़मीन के रहनेवालों के आज़माने के लिए तमाम दुनिया पर आनेवाला है |
11मैं जल्द आनेवाला हूँ | जो कुछ तेरे पास है थामे रह, ताकि कोई तेरा ताज न छीन ले |
12जो ग़ालिब आए, मैं उसे अपने खुदा के मकदिस में एक सुतून बनाउँगा | वो फिर कभी बाहर न निकलेगा, और मैं अपने खुदा का नाम और अपने खुदा के शहर, या'नी उस नए यरूशलीम का नाम जो मेरे खुदा के पास से आसमान से उतरने वाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा |
13जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है |
14"और लौदीकिया की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख : "जो आमीन और सच्चा और बरहक़ गवाह और खुदा की कायनात की शुरुआत है, वो ये फ़रमाता है कि
15"मैं तेरे कामों को जानता हूँ कि न तू सर्द है न गर्म | काश कि तू सर्द या गर्म होता !
16पस चूँकि तू न तो गर्म है न सर्द बल्कि नीम गर्म है, इसलिए मैं तुझे अपने मुँह से निकाल फेंकने को हूँ |
17और चूँकि तू कहता है कि मैं दौलतमन्द हूँ और मालदार बन गया हूँ और किसी चीज़ का मोहताज नहीं; और ये नहीं जानता कि तू कमबख्त और आवारा और गरीब और अन्धा और नंगा है |
18इसलिए मैं तुझे सलाह देता हूँ कि मुझ से आग में तपाया हुआ सोना ख़रीद ले, ताकि तू उसे पहन कर नंगे पन के ज़ाहिर होने की शर्मिन्दगी न उठाए; और आँखों में लगाने के लिए सुर्मा ले, ताकि तू बीना हो जाए |
19मैं जिन जिन को 'अज़ीज़ रखता हूँ, उन सब को मलामत और हिदायत करता हूँ; पस सरगर्म हो और तौबा कर |
20देख, मैं दरवाज़े पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; अगर कोई मेरी आवाज़ सुनकर दरवाज़ा खोलेगा, तो मैं उसके पास अन्दर जाकर उसके साथ खाना खाऊँगा और वो मेरे साथ |
21जो ग़ालिब आए मैं उसे अपने साथ तख्त पर बिठाऊँगा, जिस तरह मैं ग़ालिब आकर अपने बाप के साथ उसके तख्त पर बैठ गया |
22जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है |