1और सातों फरिश्तों में से, जिनके पास सात प्याले थे, एक ने आकर मुझ से ये कहा, "इधर आ ! मैं तुझे उस बड़ी कस्बी की सज़ा दिखाऊँ, जो बहुत से पानियों पर बैठी हुई है;
2और जिसके साथ ज़मीन के बादशाहों ने हरामकारी की थी, और ज़मीन के रहनेवाले उसकी हरामकारी की मय से मतवाले हो गए थे |
3पस वो मुझे रूह में जंगल को ले गया, वहाँ मैंने किरमिज़ी रंग के हैवान पर, जो कुफ्र के नामों से लिपा हुआ था और जिसके सात सिर और दस सींग थे, एक 'औरत को बैठे हुए देखा |
4ये औरत इर्गवानी और किरमिजी लिबास पहने हुए सोने और जवाहर और मोतियों से आरास्ता थी और एक सोने का प्याला मक्रूहात जो उसकी हरामकारी की नापकियों से भरा हुआ था |
5और उसके माथे पर ये नाम लिखा हुआ : था "रोज़; बड़ा शहर-ए-बाबुल कस्बियों और ज़मीन की मकरूहात की माँ |"
6और मैंने उस 'औरत को मुद्द्सों का खून और ईसा' के शहीदों का खून पीने से मतवाला देखा, और उसे देखकर सख्त हैरान हुआ |
7उस फरिश्ते ने मुझ से कहा, "तू हैरान क्यों हो गया मैं इस औरत और उस हैवान का, जिस पर वो सवार है जिसके सात सिर और दस सींग हैं, तुझे भेद बताता हूँ |
8ये जो तू ने हैवान देखा है, ये पहले तो था मगर अब नहीं है; और आइन्दा अथाह गड्ढे से निकलकर हलाकत में पड़ेगा, और ज़मीन के रहनेवाले जिनके नाम दुनिया बनाने से पहले के वक़्त से किताब-ए-हयात में लिखे नहीं गए, इस हैवान का ये हाल देखकर कि पहले था और अब नहीं और फिर मौजूद हो जाएगा, ता'ज्जुब करेंगे |
9यही मौका' है उस ज़हन का जिसमें हिकमत है : वो सातों सिर पहाड़ हैं, जिन पर वो 'औरत बैठी हुई है |
10और वो सात बादशाह भी हैं, पाँच तो हो चुके हैं, और एक मौजूद, और एक अभी आया भी नहीं और जब आएगा तो कुछ 'अरसे तक उसका रहना ज़रूर है |
11और जो हैवान पहले था और अब नहीं, वो आठवाँ है और उन सातों में से पैदा हुआ, और हलाकत में पड़ेगा |
12और वो दस सींग जो तू ने देखे दस बादशाह हैं | अभी तक उन्होंने बादशाही नहीं पाई, मगर उस हैवान के साथ घड़ी भर के वास्ते बादशाहों का सा इख़्तियार पाएँगे |
13इन सब की एक ही राय होगी, और वो अपनी कुदरत और इख्तियार उस हैवान को दे देंगे |
14वो बर्रे से लड़ेंगे और बर्रा उन पर ग़ालिब आएगा, क्यूँकि वो खुदावन्दों का खुदावन्द और बादशाहों का बादशाह है; और जो बुलाए हुए और चुने हुए और वफ़ादार उसके साथ हैं, वो भी ग़ालिब आएँगे |"
15फिर उसने मुझ से कहा, "जो पानी तू ने देखा जिन पर कस्बी बैठी है, वो उम्म्तें और गिरोह और कौमें और अहले ज़बान हैं |
16और जो दस सींग तू ने देखे, वो और हैवान उस कस्बी से 'अदावत रखेंगे, और उसे बेबस और नंगा कर देंगे और उसका गोश्त खा जाएँगे, और उसको आग में जला डालेंगे |
17क्यूँकि खुदा उनके दिलों में ये डालेगा कि वो उसी की राय पर चलें, वो एक -राय होकर अपनी बादशाही उस हैवान को दे दें |
18और वो 'औरत जिसे तू ने देखा, वो बड़ा शहर है जो ज़मीन के बादशाहों पर हुकूमत करता है |"