1और याकूब ने अपने बेटों को ये कह कर बुलवाया, "तुम सब जमा' हो जाओ, ताके मैं तुम को बताऊँ के आखिरी दिनों में तुम पर क्या-क्या गुज़रेगा।
2"ऐ, याकूब के बेटों जमा' हो कर सुनो, और अपने बाप इस्राईल की तरफ़ कान लगाओ।
3ऐ रूबिन ! तू मेरा पहलौठा, मेरी कुव्वत और मेरी शहज़ोरी का पहला फल है।तू मेरे रौब की और मेरी ताक़त की शान है।
4तू पानी की तरह बेसबात है, इसलिए मुझे फ़ज़ीलत नहीं मिलेगी क्यूँके तू अपने बाप के बिस्तर पर चढ़ा तूने उसे नजिस किया; रूबिन मेरे बिछोने पर चढ़ गया।
5शमा'ऊन और लावी तो भाई-भाई हैं, उनकी तलवारें जुल्म के हथियार हैं।
6ऐ मेरी जान! उनके मधरे में शरीक न हो, ऐ मेरी बुजुर्गी! उनकी मजलिस में शामिल न हो, क्यूँके उन्होंने अपने ग़ज़ब में एक मर्द को कत्ल किया, और अपनी खुदराई से बैलों की कोन्चें काटीं।
77 लानत उनके ग़ज़ब पर, क्यूँके वो तुन्द था। और उनके क़हर पर, क्यूँके वो सख़्त था; मैं उन्हें याकूब में अलग अलग और इस्राईल में परागन्दा कर दूँगा।
8ऐ यहूदाह, तेरे भाई तेरी मदह करेंगे, तेरा हाथ तेरे दुश्मनों की गर्दन पर होगा। तेरे बाप की औलाद तेरे आगे सरनगू होगी।
9यहूदाह शेर-ए-बबर का बच्चा है ऐ मेरे बेटे! तू शिकार मार कर चल दिया है। वो शेर-ए-बबर, बल्के शेरनी की तरह दुबक कर बैठ गया, कौन उसे छेड़े?
10यहूदाह से सल्तनत नहीं छूटेगी। और न उसकी नस्ल से हुकूमत का 'असा मौकूफ़ होगा।* जब तक शीलोह न आए और क़ौमें उसकी मुती'अ होंगी।
11वो अपना जवान गधा अंगूर के दरख़्त से, और अपनी गधी का बच्चा 'आला दरजे के अंगूर के दरख़्त से बाँधा करेगा; वो अपना लिबास मय में, और अपनी पोशाक आब-ए अंगूर में धोया करेगा
12उसकी आँखें मय के सबब से लाल, और उसके दाँत दूध की वजह से सफ़ेद रहा करेंगे।
13ज़बूलून समुन्दर के किनारे बसेगा, और जहाज़ों के लिए बन्दर का काम देगा, और उसकी हद सैदा तक फैली होगी।
14इश्कार मज़बूत गधा है, जो दो भेड़सालों के दर्मियान बैठा है;
15उसने एक अच्छी आरामगाह और खुशनुमा ज़मीन की देख कर अपना कन्धा बोझ उठाने को झुकाया, और बेगार में गुलाम की तरह काम करने लगा।
16दान इस्राईल के कबीलों में से एक की मानिन्द अपने लोगों का इन्साफ़ करेगा।
17दान रास्ते का सौंप है, वो राहगुज़र का अफ़'ई है, जो घोड़े के 'अकब को ऐसा डसता है के उसका सवार पछाड़ खा कर गिर पड़ता है।
18ऐ ख़ुदावन्द, मैं तेरी नजात की राह देखता आया हूँ।
19जद पर एक फौज़ हमला करेगी पर वो उसके दुम्बाला पर छापा मारेगा ।
20आशर नफीस अनाज पैदा किया करेगा और बादशाहों के लाइक लज़ीज़ अशया मुहय्या करेगा।
21नफ़्ताली ऐसा है जैसा छूटी हुई हरनी, वो मीठी-मीठी बातें करता है।
22यूसुफ़ एक फलदार पौधा है,* ऐसा फलदार पौधा जो पानी के चश्में के पास लगा हुआ हो, और उसकी शाखें । दीवार पर फैल गई हों।
23तीरंदाज़ों ने उसे बहुत छेड़ा और मारा और सताया है;
24लेकिन उसकी कमान मज़बूत रही, और उसके हाथों और बाजुओं ने याकूब के क़ादिर के हाथ से कुवत पाई, वहीं से वो चौपान उठा है जो इस्राईल की चटान है।
25ये तेरे बाप के ख़ुदा का काम है, जो तेरी मदद करेगा, उसी क़ादिर-ए-मुतलक का काम जो ऊपर से आसमान की बरकतें, और नीचे से गहरे समुन्दर कि बरकतें 'अता करेगा।
26तेरे बाप की बरकतें, मेरे बाप दादा की बरकतों से कहीं ज़ियादा हैं, और क़दीम पहाड़ों की इन्तिहा तक पहुँची हैं; वो यूसुफ़ के सिर, बल्के उसके सिर की चाँदी पर जो अपने भाइयों से जुदा हुआ नाज़िल होंगी।
27बिनयमीन फाड़ने वाला भेड़िया है, वो सुब्ह को शिकार खाएगा और शाम को लूट का माल बाँटेगा।
28इस्राईल के बारह कबीले यही हैं : और उनके बाप ने जो-जो बातें कह कर उनको बरकत दीं वो भी यही हैं; हर एक को, उसकी बरकत के मुवाफ़िक़ उसने बरकत दी।
29फिर उसने उनको हुक्म किया और कहा, कि मैं अपने लोगों में शामिल होने पर हूँ; मुझे मेरे बाप दादा के पास उस मग़ारह मारे में जो इफ़रोन हिती के खेत में है दफ़्न करना,
30यानी उस मग़ारे में जो मुल्क-ए-कनान में ममरे के सामने मकफ़ीला के खेत में है, जिसे अब्रहाम ने खेत समेत 'इफ़रोन हिती से मोल लिया था, ताके गोरिस्तान के लिए वो उसकी मिलिकयत बन जाए।
31वहाँ उन्होंने अब्रहाम को और उसकी बीवी सारा को दफ़न किया, वहीं उन्होने इज़्हाक और उसकी बीवी रिब्ल्का को दफ़न किया, और वहीं मैंने भी लियाह को दफ़न किया,
32यानी उसी खेत के माग़ारे में जो बनी हित से खरीदा था।"
33और जब याकूब अपने बेटों को वसियत कर चुका तो, उसने अपने पाँव बिछोने पर समेट लिए और दम छोड़ दिया और अपने लोगों में जा मिला।