1इन बातों के बाद यूँ हुआ के किसी ने यूसुफ़ से कहा, "तेरा बाप बीमार है।" सो वो अपने दोनो बेटों, मनस्सी और इफ़ाईम को साथ लेकर चला।
2और याकूब से कहा गया, "तेरा बेटा यूसुफ़ तेरे पास आ रहा है," और इस्राईल अपने को संभाल कर पलंग पर बैठ गया।
3और याकूब ने यूसुफ़ से कहा, "खुदा-ए-क़ादिर-ए-मुतलक मुझे लूज़ में जो मुल्क-ए-कनान में है, दिखाई दिया और मुझे बरकत दी।
4और उसने मुझ से कहाँ मै तुझे बरोमंद करूँगा और बढ़ाऊंगा और तुझ से क़ौमों का एक जुमरा पैदा करूंगा; और तेरे बाद ये ज़मीन तेरी नस्ल को दूँगा, ताके ये उनकी दाइमी मिल्कियत हो जाए।'
5सो तेरे दोनों बेटे, जो मुल्क-ए-मिस्र में मेरे आने से पहले पैदा हुए मेरे हैं, यानी रूबिन और शमा'ऊन की तरह इफ़ाईम और मनस्सी भी मेरे ही होंगे।
6और जो औलाद अब उनके बाद तुझ से होगी वो तेरी ठहरेगी, पर अपनी मीरास में अपने भाइयों के नाम से वो लोग नामज़द होंगे।
7और मैं जब फ़हान से आता था तो राखिल ने रास्ते ही में जब इफ़रात थोड़ी दूर रह गया था, मेरे सामने मुल्क-ए-कनान में वफ़ात पाई। और मैंने उसे वहीं इफ़रात के रास्ते में दफ़्न किया। बैतलहम वुही है।"
8फिर इस्राईल ने यूसुफ़ के बेटों को देख कर पूछा, "ये कौन हैं?"
9यूसुफ़ ने अपने बाप से कहा, "ये मेरे बेटे हैं जो ख़ुदा ने मुझे यहाँ दिए हैं।" उसने कहा, "उनको ज़रा मेरे पास ला, मैं उनको बरकत दूँगा।"
10लेकिन इस्राईल की आँखें बुढ़ापे के सबब से धुन्धला गई थीं, और उसे दिखाई नहीं देता था। सो यूसुफ़ उनको उसके नज़दीक ले आया। तब उसने उनको चूम कर गले लगा लिया।
11और इस्राईल ने यूसुफ़ से कहा, "मुझे तो ख़याल भी न था के मैं तेरा मुँह देखेंगा लेकिन ख़ुदा ने तेरी औलाद भी मुझे दिखाई।"
12और यूसुफ़ उनको अपने घुटनों के बीच से हटा कर मुँह के बल ज़मीन तक झुका।
13और यूसुफ़ उन दोनों को लेकर, यानी इफ़ाईम को अपने दहने हाथ से इस्राईल के बाएं हाथ के मुकाबिल और मनस्सी को अपने बाएं हाथ से इस्राईल के दहने हाथ के मुक़ाबिल करके, उनको उसके नज़दीक लाया।
14और इस्राईल ने अपना दहना हाथ बढ़ा कर इफ़ाईम के सिर पर जो छोटा था, और बाँया हाथ मनस्सी के सिर पर रख दिया। उसने जान बूझ कर अपने हाथ यूँ रख्खे, क्यूँके पहलौठा तो मनस्सी ही था।
15और उसने यूसुफ़ को बरकत दी और कहा, "ख़ुदा, जिसके सामने मेरे बाप अब्रहाम और इज़्हाक ने अपना दौर पूरा किया; वो ख़ुदा, जिसने सारी उम्र आज के दिन तक मेरी पासबानी की।
16और वी फ़िरिश्ता, जिसने मुझे सब बलाओं से बचाया, इन लड़कों को बरकत दे; और जो मेरा और मेरे बाप दादा अब्रहाम और इज़्हाक का नाम है उसी से ये नामज़द हों, और ज़मीन पर निहायत कसरत से बढ़ जाएँ।"
17और यूसुफ़ ये देखकर के उसके बाप ने अपना दहना हाथ इफ़ाईम के सिर पर रख्खा, नाखुश हुआ और उसने अपने बाप का हाथ थाम लिया, ताके उसे इफ़ाईम के सिर पर से हटाकर मनस्सी के सिर पर रख्खे।
18और यूसुफ़ ने अपने बाप से कहा, "ऐ मेरे बाप, ऐसा न कर; क्यूँके पहलौठा ये है, अपना दहना हाथ इसके सिर पर रख।"
19उसके बाप ने न माना, और कहा, "ऐ मेरे बेटे, मुझे खूब मालूम है। इससे भी एक गिरोह पैदा होगी और ये भी बुजुर्ग होगा, पर इसका छोटा भाई इससे बहुत बड़ा होगा और उसकी नस्ल से बहुत सी क़ौमें होंगी।"
20और उसने उनको उस दिन बरकत बख्शी और कहा, "इस्राइली तेरा नाम ले लेकर यूँ दु'आ दिया करेंगे, 'ख़ुदा तुझ को इफ़ाईम और मनस्सी को मानिन्द इकबालमन्द करे' !' सो उसने इफ़ाईम को मनस्सी पर फ़ज़ीलत दी।
21और इस्राईल ने यूसुफ़ से कहा, "मैं तो मारत हूँ लेकिन ख़ुदा तुम्हारे साथ होगा और तुम को फिर तुम्हारे बाप दादा के मुल्क में ले जाएगा।
22और मैं तुझे तेरे भाइयों से ज़ियादा एक हिस्सा, जो मैने अमोरियों के हाथ से अपनी तलवार और कमान से लिया देता