1और आदम अपनी बीवी हवा के पास गया, और वो हामिला हुई और उसके क़ाइन पैदा हुआ। तब उसने कहा, "मुझे ख़ुदावन्दसे एक मर्द मिला।”
2फिर क्राइन का भाई हाबिल पैदा हुआ; और हाबिल भेड़ बकरियों का चरवाहा और काइन किसान था।
3चन्द रोज़ के बाद यूँ हुआ के क़ाइन अपने खेत के फल का हदिया ख़ुदावन्द के वास्ते लाया।
4और हाबिल भी अपनी भेड़ बकरियों के कुछ पहलौठे बच्चों का और कुछ उनकी चबी का हदिया लाया। और ख़ुदावन्द ने हाबिल को और उसके हदिये को मंजूर किया,
5पर क़ाइन को और उसके हदिये को मंजूर न किया। इसलिए काइन निहायत ग़ज़बनाक हुआ और उसका मुँह बिगड़ा।
6और ख़ुदावन्द ने क़ाइन से कहा, "तू क्यूं ग़ज़बनाक हुआ? और तेरा मुँह क्यूँ बिगड़ा हुआ है?
7अगर तू भला करे तो क्या तू मक्बूल न होगा? और अगर तू भला न करे तो गुनाह दरवाज़े पर दुबका बैठा है और तेरा मुश्ताक़ है, पर तू उस पर गालिब आ।"
8और काइन ने अपने भाई हाबिल को कुछ कहा* और जब वो दोनों खेत में थे तो यूँ हुआ के काइन ने अपने भाई हाबिल पर हमला किया और उसे कत्ल कर डाला।
9तब ख़ुदावन्द ने काइन से कहा, "तेरा भाई हाबिल कहाँ है?" उसने कहा, "मुझे मालूम नहीं; क्या मैं अपने भाई का मुहाफ़िज़ हूँ?"
10फिर उसने कहा, "तूने ये क्या किया? तेरे भाई का खून ज़मीन से मुझ को पुकारता है।
11और अब तू ज़मीन की तरफ़ से लानती हुआ, जिसने अपना मुँह पसारा के तेरे हाथ से तेरे भाई का खून ले।
12जब तू ज़मीन को जोतेगा, तो वो अब तुझे अपनी पैदावार न देगी*; और ज़मीन पर तू ख़ानाख़राब और आवारा होगा।"
13तब क़ाइन ने ख़ुदावन्द से कहा, "मेरी सज़ा बदश्त से* बाहर है।
14देख, आज तूने मुझे रू-ए-ज़मीन से निकाल दिया है, और मैं तेरे हुजूर से रूपोश हो जाऊँगा; और ज़मीन पर खानाख़राब और आवारा रहूँगा, और ऐसा होगा के जो कोई मुझे पाएगा क़त्ल कर डालेगा।"
15तब ख़ुदावन्द ने उसे कहा, "नहीं, बल्के जो काइन को कत्ल करे उससे सात गुना बदला लिया जाएगा।" और ख़ुदावन्द ने काइन के लिए एक निशान ठहराया के कोई उसे पा कर मार न डाले।
16सो, क़ाइन ख़ुदावन्द के हुजूर से निकल गया और 'अदन के मशरिक की तरफ़ नूद* के इलाके में जा बसा।
17और क़ाइन अपनी बीवी के पास गया और वो हामिला हुई और उसके हनूक पैदा हुआ; और उसने एक शहर बसाया और उसका नाम अपने बेटे के नाम पर हनूक रखा।
18और हनूक से ईराद पैदा हुआ, और ईराद से महुयाएल पैदा हुआ, और महुयाएल से मतूसाएल पैदा हुआ, और मत्तूसाएल से लमक पैदा हुआ।
19और लमक दो 'औरतें ब्याह लाया : एक का नाम 'अदा और दूसरी का नाम ज़िल्ला था।
20और 'अदा के याबल पैदा हुआ : वो उनका बाप था जो खेमों में रहते और जानवर पालते हैं।
21और उसके भाई का नाम यूबल था : वो बीन और बांसली बजाने वालों का बाप था।
22और ज़िल्ला के भी तूबलकाइन पैदा हुआ : जो पीतल* और लोहे के सब तेज़ हथियारों का बनाने वाला था; और नामा तूबलकाइन की बहन थी।
23और लमक ने अपनी बीवियों से कहा, "ऐ 'अदा और ज़िल्ला मेरी बात सुनो, ऐ लमक की बीवियो, मेरे सुखन पर कान लगाओ : मैंने एक मर्द को जिसने मुझे ज़ख़्मी किया, मार डाला । और एक जवान को जिसने मेरे चोट लगाई, कत्ल कर डाला।
24अगर काइन का बदला सात गुना लिया जाएगा, तो लमक का सत्तर और सात गुना।"
25और आदम फिर अपनी बीवी के पास गया और उसके एक और बेटा हुआ और उसका नाम सेत रखा : और वो कहने लगी, "खुदा ने हाबिल के इवज़ जिसको क़ाइन ने क़त्ल किया, मुझे दूसरा फ़र्ज़न्द दिया।"
26और सेत के यहाँ भी एक बेटा पैदा हुआ, जिसका नाम उसने अनूस रखा; उस वक्त से लोग यहोवा का नाम लेकर दुआ करने लगे।