Bible 2 India Mobile
[VER] : [URDU]     [PL]  [PB] 
 <<  Galatians 5 >> 

1मसीह ने हमे आज़ाद रहने के लिए आज़ाद किया है; पस क़ायम रहो, और दोबारा गुलामी के जुवे में न जुतो|

2देखो, मैं पौलुस तुमसे कहता हूँ कि अगर तुम ख़तना कराओगे तो मसीह से तुम को कुछ फ़ाइदा न होगा|

3बल्कि मैं हर एक ख़तना करने वाले आदमी पर फिर गवाही देता हूँ,कि उसे तमाम शरी'अत पर ' अमल करना फर्ज़ है|

4तुम जो शरी'अत के वसीले से रास्तबाज़ ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग हो गए और फ़ज़ल से महरूम|

5क्यूंकि हम रूह के ज़रिए , ईमान से रास्तबाजी की उम्मीद बर आने के मुन्तजिर हैं|

6और मसीह ईसा' में न तो ख़तना कुछ काम का है न नामख्तूनी मगर ईमान जो मुहब्बत की राह से असर करता है|

7तुम तो अच्छी तरह दौड़ रहे थे किसने तम्हें हक के मानने से रोक दिया |

8ये तरगीब तुम्हारे बुलाने वाले की तरफ से नही है|

9थोड़ा सा ख़मीर सारे गूँधे हुए आटे को खमीर कर देता है|

10मुझे ख़ुदावन्द में तुम पर ये भरोसा है कि तुम और तरह का ख्याल न करोगे; लेकिन जो तुम्हे उलझा देता है, वो चाहे कोई हो सज़ा पाएगा|

11और ए भाइयों! अगर मैं अब तक खतना का एलान करता हूँ, तो अब तक सताया क्यूँ जाता हूँ?इस सूरत में तो सलीब की ठोकर तो जाती रही|

12काश कि तुम्हे बेक़रार करने वाले अपना तअ'ल्लुक़ तोड़ लेते|

13ऐ भाइयों! तुम आज़ादी के लिए बुलाए तो गए हो,मगर ऐसा न हो कि ये आज़ादी जिस्मानी बातों का मौक़ा, बने; बल्कि मुहब्बत की राह पर एक दूसरे की खिदमत करो|

14क्यूँकि पूरी शरी'अत पर एक ही बात से 'अमल हो जाता है, या;नी इससे कि "तू अपने पड़ौसी से अपनी तरह मुहब्बत रख|"

15लेकिन अगर तुम एक दूसरे को फाड़ खाते हो,तो खबरदार रहना कि एक दूसरे का सत्यानास न कर दो|

16मगर मैं तुम से ये कहता हूँ,रूह के मुताबिक चलो तो जिस्म की ख्वाहिश को हरगिज़ पूरा न करोगे |

17क्यूँकि जिस्म रूह के खिलाफ़ ख्वाहिश करता है और रूह जिस्म के खिलाफ है, और ये एक दूसरे के मुखालिफ़ हैं,ताकि जो तुम चाहो वो न करो|

18और अगर तुम रूह की हिदायत से चलते हो,तो शरी'अत के मातहेत नहीं रहे|

19अब जिस्म के काम तो ज़ाहिर हैं,या'नी कि हरामकारी , नापाकी ,शहवत परस्ती,|

20बुत परसती, जादूगरी, अदावतें, झगड़ा, हसद,गूस्सा तफिरके, जुदाइयाँ बिद'अतें,

21अदावत ,नशाबाज़ी,नाच रंग और इनकी तरह, इनके ज़रिए तुम्हे पहले से कहे देता हूँ जिसको पहले बता चुका हूँ कि ऐसे काम करने वाले खुदा की बादशाही के वारिस न होंगे |

22,मगर रूह का फल मुहब्बत,ख़ुशी, इत्मिनान,सब्र ,महरबनी,नेकी,ईमानदारी

23हिल्म,परहेजगारी है;ऐसे कामों की कोई शरी;अत मुखालिफ़ नहीं|

24और जो मसीह ईसा' के हैं उन्होंने जिस्म को उसकी रगबतों और ख्वाहिशों समेत सलीब पर खींच दिया है|

25अगर हम रूह की वजह से जिंदा हैं, तो रूह के मुवाफ़िक चलना भी चाहिए|

26हम बेज़ा फ़ख्र करके न एक दूसरे को चिढ़ायें,न एक दूसरे से जलें|


  Share Facebook  |  Share Twitter

 <<  Galatians 5 >> 


Bible2india.com
© 2010-2025
Help
Dual Panel

Laporan Masalah/Saran