Bible 2 India Mobile
[VER] : [URDU]     [PL]  [PB] 
 <<  Galatians 3 >> 

1ऐ नादान गलितियो,किसने तुम पर जादू कर दिया? तुम्हारी तो गोया आंखों के सामने ईसा' मसीह सलीब पर दिखाया गया |

2मैं तुम से सिर्फ ये गुजारिश करना चाहता हूं :कि तुम ने शरी'अत के आ'माल से रूह को पाया या ईमान के पैगाम से?

3क्या तुम ऐसे नादान हो कि रूह के तौर पर शुरू करके अब जिस्म के तौर पर काम पूरा करना चाहते हो?

4क्या तुमने इतनी तकलीफ़े बे फ़ायदा उठाई? मगर शायद बे फ़ायदा नहीं |

5पर जो तुम्हें रूह बख़्शता और तुम में मो'जिजे जाहिर करता है,क्या वो शरी'अत के आ'माल से ऐसा करता है या ईमान के पैगाम से?

6चुनाचे "अब्रहाम ख़ुदा पर ईमान लाया और ये उसके लिऐ रास्तबाज़ी गिना गया |"

7पस जान लो कि जो ईमानवाले है, वही अब्रहाम के फरज़ंद हैं |

8और किताब-ए- मुकद्दस ने पहले से ये जान कर कि खुदा गैर क़ौमों को ईमान से रास्तबाज़ ठहराएगा,पहले से ही अब्रहाम को ये खुशखबरी सुना दी, ''तेरे ज़रिए सब क़ौमें बरकत पाएँगी |"

9इस पर जो ईमान वाले है, वो ईमानदार अब्रहाम के साथ बरकत पाते है |

10क्यूंकि जितने शरी'अत के आ'माल पर तकिया करते है, वो सब ला'नत के मातहेत है;चुनाचे लिखा है,जो कोई उन सब बातों को जो किताब में से लिखी है;कायम न रहे वो ला"नती है|"

11और ये बात साफ़ है कि शरी'अत के वसीले से कोई इन्सान खुदा के नजदीक रास्तबाज़ नहीं ठहरता,क्यूंकि लिखा है,"रास्तबाज़ ईमान से जीता रहेगा|"

12और शरी'अत को ईमान से कुछ वास्ता नहीं,बल्कि लिखा है, "जिसने इन पर 'अमल किया, वो इनकी वजह से जीता रहेगा "

13मसीह जो हमारे लिए ला'नती बना, उसने हमे मोल लेकर शरी'अत की लानत से छुड़ाया,क्यूंकि लिखा है, "जो कोई लकड़ी पर लटकाया गया वो ला'नती है |"

14ताकि मसीह ईसा' में अब्रहाम की बरकत गैर क़ौमों तक भी पहूँचे, और हम ईमान के वसीले से उस रूह को हासिल करें जिसका वा'दा हुआ है |

15ऐ भाइयों !मैं इन्सानियत के तौर पर कहता हूँ कि अगर आदमी ही का 'अहद हो ,जब उसकी तसदीक हो गई हो तो कोई उसको बातिल नहीं करता और ना उस पर कुछ बढ़ाता है |

16पस अब्रहाम और उसकी नस्ल से वा'दे किए गए |वो ये नहीं कहता,नस्लों से,"जैसा बहुतों के वास्ते कहा जाता है:बल्कि जैसा एक के वास्ते,तेरी नस्ल को और वो मसीह है|

17मेरा ये मतलब है :जिस 'अहद की खुदा ने पहले से तसदीक़ की थी,उसको शरी'अत चार सौ तीस बरस के बा'द आकर बातिल नहीं कर सकती कि वो वा'दा लाहासिल हो|

18क्यूंकि अगर मीरास शरी'अत की वजह से मिली है तो वा'दे की वजह से ना हुई,मगर अब्रहाम को ख़ुदा ने वा'दे ही की राह से बख़्शी|

19पस शरी'अत क्या रही?वो नाफ़रमानियों की वजह से बा'द मे दी गई कि उस नस्ल के आने तक रहे, जिससे वा'दा किया गया था;और वो फरिश्तों के वसीले से एक दरमियानी की मा'रीफ़त मुक़र्रर की गई|

20अब दर्मियानी एक का नहीं होता, मगर ख़ुदा एक ही है |

21पस क्या शरी'अत ख़ुदा के वा'दों के खिलाफ़ है?हरगिज़ नहीं !क्यूंकि अगर कोई एसी शरी'अत दी जाती जो जिंदगी बख्श सकती तो, अलबत्ता रास्तबाजी शारी'अत की वजह से होती|

22मगर किताब-ए-मुक़द्दस ने सबको गुनाह के मातहेत कर दिया,ताकि वो वा'दा जो "ईसा" मसीह पर ईमान लाने पर मौकूफ़ है, ईमानदारों के हक़ में पूरा किया जाए |

23ईमान के आने से पहले शरी'अत की मातहती मे हमारी निगहबनी होती थी, और उस ईमान के आने तक जो ज़हिर होनेवाला था, हम उसी के पाबन्द रहे|

24पस शरी'अत मसीह तक पहूँचाने को हमारा उस्ताद बनी,ताकि हम ईमान की वज़ह से रास्तबाज़ ठहरें|

25मगर जब ईमान आ चुका,तो हम उस्ताद के मातहेत ना रहे|

26क्यूंकि तुम उस ईमान के वसीले से जो मसीह "ईसा' में है, ख़ुदा के फर्ज़न्द हो|

27और तुम सब, जितनों ने मसीह मैं शामिल होने का बपतिस्मा लिया मसीह को पहन लिया

28न कोई यहूदी रहा न कोई यूनानी, न कोई गुलाम ना आज़ाद, न कोई मर्द न औरत,क्यूंकि तुम सब मसीह “ईसा" 'में एक ही हो|

29और अगर तुम मसीह के हो तो अब्राहम की नस्ल और वा'दे के मुताबिक़ वारिस हो|


  Share Facebook  |  Share Twitter

 <<  Galatians 3 >> 


Bible2india.com
© 2010-2025
Help
Dual Panel

Laporan Masalah/Saran