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1तब दारा बादशाह के हुक्म से बाबुल कि उस तवारीखी कुतुबखाने में जिसमें ख़ज़ाने धरे थे, तफ़्तीश की गई।

2चुनांचें अखमता के महल में जो मादै के सूबे में वाके' है, एक तूमार मिला जिसमें ये हुक्म लिखा हुआ था :

3ख़ोरस बादशाह के पहले साल ख़ोरस बादशाह ने ख़ुदा के घर की बाबत जो यरूशलीम में है हुक्म किया, के वह घर यानी वह मक़ाम जहाँ क़ुर्बानियां करते है बनाया जाए और उसकी बुनियादें मज़बूती से डाली जाएँ। उसकी ऊँचाई साठ हाथ और चौड़ाई साठ हाथ हो,

4तीन रवें भारी पत्थरों के और एक रहा नई लकड़ी का हो; और ख़र्च शाही महल से दिया जाए।

5और ख़ुदा के घर के सोने और चाँदी के बर्तन भी, जिनको नबूकदनज़र उस हैकल से जो यरूशलीम में है निकालकर बाबुल को लाया, वापस दिए जाएँ और यरूशलीम की हैकल में अपनी अपनी जगह पहुँचाए जाएँ, और तू उनको ख़ुदा के घर में रख देना।

6सो तू ऐ दरिया पार के हाकिम, ततनै और शतर-बोज़नै और तुम्हारे अफ़ारसकी रफ़ीक़ जो दरिया पार हैं तुम वहाँ से दूर रहो।

7ख़ुदा के इस घर के काम में दस्तअन्दाज़ी न करो। यहूदियों का हाकिम और यहूदियों के बुजुर्ग ख़ुदा के घर को उसकी जगह पर तामीर करें।

8'अलावा इसके ख़ुदा के इस घर के बनाने में यहूदियों के बुज़ुगों के साथ तुम को क्या करना है, सो उसकी बाबत मेरा ये हुक्म है के शाही माल में से, या'नी दरिया पार के खिराज में से उन लोगों को बिला तवक्कुफ़ ख़र्च दिया जाए, ताकि उनकी रुकना न पड़े।

9और आसमान के ख़ुदा की सोख़्तनी कुर्बानियों के लिए जिस जिस चीज़ की उनको ज़रूरत हो - या'नी बछड़े और मेंढ़े और हलवान और जितना गेंहूं और नमक और मय और तेल, वह काहिन जो यरूशलीम में हैं बताएँ, वह सब बिला-नागा रोज़-ब-रोज़ उनको दिया जाए;

10ताकि वह आसमान के ख़ुदा के हुजूर राहत अंगेज क़ुर्बानिय चदाएं और बादशाह और शहज़ादों की उम्रदराज़ी के लिए दुआ करें।

11मैंने ये हुक्म भी दिया है, के जो शख़्स इस फ़रमान को बदल दे, उसके घर में से कड़ी निकाली जाए और उसे उसी पर चढ़ाकर सूली दी जाए, और इस बात के सबब से उसका घर कूड़ाख़ाना बना दिया जाए।

12और वह ख़ुदा जिसने अपना नाम वहाँ रखा है, सब बादशाहों और लोगों को जो ख़ुदा के उस घर को जो यरूशलीम में है, ढाने की ग़रज़ से इस हुक्म को बदलने के लिए अपना हाथ बढ़ाएँ, ग़ारत करे। मुझ दारा ने हुक्म दे दिया, इस पर बड़ी कोशिश से 'अमल हो।

13तब दरिया पार के हाकिम, तत्तनै और शतर-बोज़नै, और उनके रफ़ीकों ने दारा बादशाह के फ़रमान भेजने के सबब से बिला तवक्कुफ़ उसके मुताबिक 'अमल किया।

14सो यहूदियों के बुजुर्ग, हज्जै नबी और ज़करियाह बिन इद्द की नबुचत के सबब से, तामीर करते और कामयाब होते रहे। उन्होंने इस्राईल के ख़ुदा के हुक्म, और ख़ोरस और दारा, और शाह-ए-फ़ारस अरतख़शशता के हुक्म के मुताबिक उसे बनाया और तमाम किया।

15सो ये मस्कन अदार के महीने की तीसरी तारीख़ में, दारा बादशाह की सल्तनत के छठे बरस तमाम हुआ।

16और बनी-इस्राईल, और काहिनों और लावियों और असीरी के बाक़ी लोगों ने ख़ुशी के साथ ख़ुदा के इस घर की तक़दीस की।

17और उन्होंने ख़ुदा के इस घर की तक्दीस के मौके' पर सौ बैल और दो सौ मेंढे और चार सौ बरें, और सारे इस्राईल की ख़ता की क़ुर्बानी के लिए इस्राईल के कबीलों के शुमार के मुताबिक़ बारह बकरे चढ़ाए।

18और जैसा मूसा की किताब में लिखा है, उन्होंने काहिनों को उनकी तक्सीम, और लावियों को उनके फ़रीक़ों के मुताबिक़, ख़ुदा की इबादत के लिए जो यरूशलीम में होती है मुकर्रर किया।

19और पहले महीने की चौदहवीं तारीख़ को उन लोगों ने जो असीरी से आए थे ईदए-फ़सह मनाई:

20क्यूंकि काहिनों और लावियों ने यकतन होकर अपने आपको पाक किया था, वह सबके सब पाक थे, और उन्होंने उन सब लोगों के लिए जो असौरी से आए थे, और अपने भाई काहिनों के लिए और अपने वास्ते फ़सह को ज़बह किया।

21और बनी-इस्राईल ने जो असीरी से लौटे थे, और उन सभों ने जो ख़ुदावन्द इस्राईल के ख़ुदा के तालिब होने के लिए उस सरज़मीन की अजनबी कौमों की नजासतों से अलग हो गए थे, फ़सह खाया,

22और ख़ुशी के साथ सात दिन तक फ़तीरी रोटी की ईद मनाई, क्यूँकि ख़ुदावन्द ने उनको शादमान किया था, और शाह-ए-असूर के दिल को उनकी तरफ़ माइल किया था ताकि वह ख़ुदा या'नी इस्राईल के ख़ुदा के मस्कन के बनाने में उनकी मदद करें।


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