1मनस्सी बारह बरस का था जब वह सल्तनत करने लगा, और उसने यरूशलीम में पचपन बरस सल्तनत की।
2उसने उन क़ौमों के नफ़रतअंगेज़ कामों के मुताबिक़ जिनको ख़ुदावन्द ने बनी-इस्राईल के आगे से दफ़ा' किया था, वही किया जो ख़ुदावन्द की नज़र में बुरा था।
3क्यूँकि उसने उन ऊँचे मक़ामों को, जिनको उसके बाप हिज़क्रियाह ने ढाया था, फिर बनाया और बालीम के लिए मज़बहे बनाए और यसीरतें तैयार कीं और सारे आसमानी लश्कर को सिज्दा किया और उनकी परस्तिश की।
4और उसने ख़ुदावन्द के घर में जिसकी बाबत ख़ुदावन्द ने फ़रमाया था कि मेरा नाम यरूशलीम में हमेशा रहेगा, मज़बहे बनाए;
5और उसने ख़ुदावन्द के घर के दोनों सहनों में, सारे आसमानी लश्कर के लिए मज़बहे बनाए।
6और उसने बिन हलूम की वादी में अपने फ़र्ज़न्दों को भी आग में चलवाया, और वह शगून मानता और जादू और अफ़सून करता और बदरूहों के आशनाओं और जादूगरों से ता'अल्लुक रखता था। उसने ख़ुदावन्द की नज़र में बहुत बदकारी की, जिससे उसे गुस्सा दिलाया;
7और जो खोदी हुई मूरत उसने बनवाई थी उसको ख़ुदा के घर में नस्ब किया, जिसकी बाबत ख़ुदा ने दाऊद और उसके बेटे सुलेमान से कहा था कि मैं इस घर में और यरूशलीम में जिसे मैंने बनी-इस्राईल के सब क़बीलों में से चुन लिया है, अपना नाम अबद तक रखूँगा;
8और मैं बनी-इस्राईल के पाँव को उस सरज़मीन से जो मैंने उनके बाप-दादा को 'इनायत की है, फिर कभी नहीं हटाऊँगा बशर्ते कि वह उन सब बातों को जो मैंने उनकी फ़रमाई, या'नी उस सारी शरी'अत और आईन और हुक्मों को जो मूसा की मा'रिफ़त मिले, मानने की एहतियात रखें।
9और मनस्सी ने यहूदाह और यरूशलीम के बाशिन्दों को यहाँ तक गुमराह किया कि उन्होंने उन क़ौमों से भी ज़्यादा बदी की, जिनको ख़ुदावन्द ने बनी-इस्राईल के सामने से हलाक किया था।
10और ख़ुदावन्द ने मनस्सी और उसके लोगों से बातें कीं पर उन्होंने कुछ ध्यान न दिया।
11इसलिए ख़ुदावन्द उन पर शाह-ए-असूर के सिपहसालारों को चढ़ा लाया, जो मनस्सी को ज़ॅजीरों से जकड़ कर और बेड़ियाँ डाल कर बाबुल को ले गए।
12जब वह मुसीबत में पड़ा तो उसने ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा से मिन्नत की और अपने बाप-दादा के ख़ुदा के हुजूर निहायत ख़ाकसार बना,
13और उसने उससे दु'आ की; तब उसने उसकी दु'आ उसे उसकी ममलुकत में यरूशलीम को वापस लाया। तब मनस्सी ने जान लिया कि ख़ुदावन्द ही ख़ुदा है।
14इसके बा'द उसने दाऊद के शहर के लिए जैहून के मग़रिब की तरफ़ वादी में मछली फाटक के मदखल तक एक बाहर की दीवार उठाई, और 'ओफ़ल को घेरा और उसे बहुत ऊँचा किया; और यहूदाह के सब फ़सीलदार शहरों में बहादुर जंगी सरदार रखे।
15और उसने अजनबी मा'बूदों को, और ख़ुदावन्द के घर से उस मूरत को, और सब मज़बहों को जो उसने ख़ुदावन्द के घर के पहाड़ पर और यरूशलीम में बनवाए थे दूर किया और उनको शहर के बाहर फेंक दिया।
16और उसने ख़ुदावन्द के मज़बह की मरम्मत की और उस पर सलामती के ज़बीहों की और शुक्रगुज़ारी की कुर्बानियाँ चढ़ाई, और यहूदाह को ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा की परस्तिश का हुक्म दिया।
17तौ भी लोग ऊँचे मक़ामों में क़ुर्बानी करते रहे, पर फ़क़त ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा के लिए।
18और मनस्सी के बाक़ी काम और अपने ख़ुदा से उसकी दु'आ, और उन गैबबीनों की बातें जिन्होंने ख़ुदावन्द इस्राईल के ख़ुदा के नाम से उसके साथ कलाम किया, वह सब इस्राईल के बादशाहों के आ'माल के साथ कलमबन्द हैं।
19उसकी दु'आ और उसका क़बूल होना, और उसकी ख़ाकसारी से पहले की सब ख़ताएँ और उसकी बेईमानी और वह जगहें जहाँ उसने ऊंचे मक़ाम बनवाये और यसीरतें और खोदी हुई मूरतें खड़ी कीं, ये सब बातें हूज़ी की तारीख़ में क़लमबन्द हैं।
20और मनस्सी अपने बाप-दादा के साथ सो गया, और उन्होंने उसे उसी के घर में दफ़्न किया; और उसका बेटा अमून उसकी जगह बादशाह हुआ।
21अमून बाइस बरस का था जब वह सल्तनत करने लगा, और उसने दो बरस यरूशलीम में सल्तनत की।
22और जो ख़ुदावन्द की नज़र में बुरा है वही उसने किया, जैसा उसके बाप मनस्सी ने किया था। और अमून ने उन सब खोदी हुई मूरतों के आगे जो उसके बाप मनस्सी ने बनवाई थीं, कुर्बानियाँ कीं और उनकी परस्तिश की।
23और वह ख़ुदावन्द के हुजूर ख़ाकसार न बना, जैसा उसका बाप मनस्सी ख़ाकसार बना था; बल्कि अमून ने गुनाह पर गुनाह किया।
24सो उसके ख़ादिमों ने उसके खिलाफ़ साज़िश की और उसी के घर में उसे मार डाला।
25पर अहल-ए-मुल्क ने उन सबको क़त्ल किया जिन्होंने अमून बादशाह के ख़िलाफ़ साज़िश की थी, और अहल-ए-मुल्क ने उसके बेटे यूसियाह को उसकी जगह बादशाह बनाया |