1आख़ज़ बीस बरस का था जब वह सल्तनत करने लगा, और उसने सोलह बरस यरूशलीम में सल्तनत की। और उसने वह न किया जो ख़ुदावन्द की नज़र में दुरुस्त है जैसा उसके बाप-दादा ने किया था
2बल्कि इस्राईल के बादशाहों की राहों पर चला, और बालीम की ढाली हुई मूरतें भी बनवाई।
3इसके सिवा उसने हिनूम के बेटे की वादी में बख़ूर जलाया, और उन क़ौमों के नफ़रती दस्तूरों के मुताबिक़ जिनको ख़ुदावन्द ने बनी-इस्राईल के सामने से ख़ारिज किया था, अपने ही बेटों को आग में झोंका।
4उसने ऊँचे मक़ामों और पहाड़ों पर, और हर एक हरे दरख़्त के नीचे कुर्बानियाँ कीं और बख़ूर जलाया।
5इसलिए उसके ख़ुदा ने उसको शाह-ए-अराम के हाथ में कर दिया, सो उन्होंने उसे मारा और उसके लोगों में से असीरों की भीड़ की भीड़ ले गए, और उनको दमिश्क में लाए; और वह शाह-ए-इस्राईल के हाथ में भी कर दिया गया, जिसने उसे मारा और बड़ी ख़ूनरेज़ी की।
6और फ़िक़ह बिन रमलिया ने एक ही दिन में यहूदाह में से एक लाख बीस हज़ार को, जो सब के सब सूर्मा थे क़त्ल किया, क्यूँकि उन्होंने ख़ुदावन्द अपने बाप-दादा के ख़ुदा को छोड़ दिया था।
7और ज़िकरी ने जो इफ़्राईम का एक पहलवान था, मासियाह शाहज़ादे को और महल के नाज़िम 'अज़रीकाम को और बादशाह के वज़ीर इल्क़ाना को मार डाला।नबी 'आोदिद
8और बनी-इस्राईल अपने भाइयों में से दो लाख 'औरतों और बेटे-बेटियों को असीर करके ले गए, और उनका बहुत सा माल लूट लिया और लूट को सामरिया में लाए।
9लेकिन वहाँ ख़ुदावन्द का एक नबी था जिसका नाम 'ओदिद था, वह उस लश्कर के इस्तकबाल को गया जो सामरिया को आ रहा था और उनसे कहने लगा, "देखो, इसलिए के ख़ुदावन्द तुम्हारे बाप-दादा का ख़ुदा यहूदाह से नाराज़ था, उसने उनको तुम्हारे हाथ में कर दिया और तुम ने उनको ऐसे तैश में क़त्ल किया है जो आसमान तक पहुँचा।
10और अब तुम्हारा 'इरादा है कि बनी यहूदाह और यरूशलीम को अपने गुलाम और लौंडियाँ बना कर उनको दबाए रखो। लेकिन क्या तुम्हारे ही गुनाह जो तुमने ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा के खिलाफ़ किए हैं, तुम्हारे सिर नहीं हैं?
11सो तुम अब मेरी सुनो और उन असीरों को, जिनको तुम ने अपने भाइयों में से असीर कर लिया है, आज़ाद करके लौटा दो क्यूँकि ख़ुदावन्द का क़ हर-ए-शदीद तुम पर है।"
12तब बनी इफ़ाईम के सरदारों में से 'अज़रियाह बिन यूहनान और बरक़ियाह बिन मसल्लीमोत और यहज़क़ियाह बिन सलूम और 'अमासा बिन ख़दली, उनके सामने जो जंग से आ रहे थे खड़े हो गए
13और उनसे कहा कि तुम असीरों को यहाँ नहीं लाने पाओगे, क्यूँकि जो तुम ने ठाना है उससे हम ख़ुदावन्द के गुनाहगार बनेंगे और हमारे गुनाह और खताएं बढ़ जायेंगी क्यूँकि हमारी खता बड़ी है और इस्राईल पर क़हर-ए-शदीद है।
14सो उन हथियारबन्द लोगों ने असीरों और माल-ए- ग़नीमत को, अमीरों और सारी जमा'अत के आगे छोड़ दिया।
15और वह आदमी जिनके नाम मज़कूर हुए, उठे और असीरों को लिया और लूट के माल में से उन सभों को जो उनमें नंगे थे, लिबास से आरास्ता किया और उनको जूते पहनाए और उनको खाने-पीने को दिया और उन पर तेल मला, और जितने उनमें कमज़ोर थे उनको गधों पर चढ़ा कर खजूर के दरख़्तों के शहर यरीहू में उनके भाइयों के पास पहुँचा दिया। तब सामरिया को लौट गए।
16उस वक़्त आख़ज़ बादशाह ने असूर के बादशाहों के पास कहला भेजा के उसकी मदद करें।
17इसलिए कि अदूमियों ने फिर चढ़ाई करके यहूदाह को मार लिया और असीरों को ले गए थे।
18और फ़िलिस्तियों ने भी नशेब की ज़मीन के और यहूदाह के जुनूब के शहरों पर हमला करके बैतशम्स और अय्यालोन और जदीरोत को, और शोको और उसके देहात को, और तिमना और उसके देहात को, और जिमसू और उसके देहात को भी ले लिया था और उनमें बस गए थे।
19क्यूँकि ख़ुदावन्द ने शाह-ए-इस्राईल आख़ज़ के सबब से यहूदाह को पस्त किया, इसलिए के उसने यहूदाह में बेहयाई की चाल चलकर ख़ुदावन्द का बड़ा गुनाह किया था;
20और शाह-ए- असूर तिगलतपिलनासर उसके पास आया, पर उसने उसको तंग किया और उसकी कुमक न की।
21क्यूँकि आख़ज़ ने ख़ुदावन्द के घर और बादशाह और सरदारों के महलों से माल लेकर शाह-ए-असूर को दिया, तौ भी उसकी कुछ मदद न हुई।
22अपनी तंगी के वक़्त में भी उसने, यानी इसी आख़ज़ बादशाह ने ख़ुदावन्द का और भी ज़्यादा गुनाह किया;
23क्यूँकि उसने दमिश्क के देवताओं के लिए जिन्होंने उसे मारा था, कुर्बानियाँ कीं और कहा, "चूँकि अराम के बादशाहों के मा'बूदों ने उनकी मदद की है, सो मैं उनके लिए क़ुर्बानी करूंगा ताकि वह मेरी मदद करें।" लेकिन वह उसकी और सारे इस्राईल की तबाही का बाइस हुए।
24और आख़ज़ ने ख़ुदा के घर के बर्तनों को जमा' किया और ख़ुदा के घर के बर्तनों को टुकड़े टुकड़े किया और ख़ुदावन्द के घर के दरवाज़ों को बन्द किया और अपने लिए यरूशलीम के हर कोने में मज़बहे बनाए।
25और यहूदाह के एक एक शहर में गैर-मा'बूदों के आगे बख़ूर जलाने के लिए ऊँचे मक़ाम बनाए, और ख़ुदावन्द अपने बाप-दादा के ख़ुदा को गुस्सा दिलाया।
26और उसके बाक़ी काम और उसके सब तौर तरीके शुरू' से आखिर तक यहूदाह और इस्राईल के बादशाहों की किताब में कलमबन्द हैं।
27और आख़ज़ अपने बाप-दादा के साथ सो गया, और उन्होंने उसे शहर में या'नी यरूशलीम में दफ़्न किया क्यूँकि वह उसे इस्राईल के बादशाहों की कब्रों में न लाए और उसका बेटा हिज़क़ियाह उसकी जगह बादशाह हुआ।