1और शाह-ए-यहूदाह यहूसफ़त यरूशलीम को अपने महल में सलामत लौटा।
2तब हनानी गैबबीन का बेटा याहू उसके इस्तक़बाल को निकला, और यहूसफ़त बादशाह से कहने लगा, क्या मुनासिब है के तू शरीरों की मदद करे, और ख़ुदावन्द के दुश्मनों से महब्बत रख्खे? इस बात के सबब से ख़ुदावन्द की तरफ़ से तुझ पर ग़ज़ब है।
3तौ भी तुझ में खूबियाँ हैं; क्यूँकि तू ने यसीरतों को मुल्क में से दफ़ा' किया, और ख़ुदा की तलाश में अपना दिल लगाया है।
4यहूसफ़त यरूशलीम में रहता था, और उसने फिर बैरसबा' से इफ़्राईम के कोहिस्तान तक लोगों के दर्मियान दौरा करके, उनको ख़ुदावन्द उनके बाप-दादा के ख़ुदा की तरफ़ फिर रुजू किया।
5उसने यहूदाह के सब फ़सीलदार शहरों में शहर-ब-शहर क़ाज़ी मुक़र्रर किए,
6और क़ाज़ियों से कहा, जो कुछ करो सोच समझकर करो, क्यूँकि तुम आदमियों की तरफ़ से नहीं, बल्कि ख़ुदावन्द की तरफ़ से 'अदालत करते हो; और वह फ़ैसले में तुम्हारे साथ है।
7पस ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ तुम में रहे; सो ख़बरदारी से काम करना, क्यूँकि ख़ुदावन्द हमारे ख़ुदा में बेइन्साफ़ी नहीं है, और न किसी की रूदारी न रिश्वतखोरी |
8और यरूशलीम में भी यहूसफ़त ने लावियों और काहिनों और इस्राईल के आबाई ख़ान्दानों के सरदारों में से लोगों को, ख़ुदावन्द की 'अदालत और मुक़द्दमों के लिए मुक़र्रर किया; और वह यरूशलीम को लौटे
9और उसने उनको ताकीद की और कहा कि तुम ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ से दियानतदारी और कामिल दिल से ऐसा करना।
10जब कभी तुम्हारे भाइयों की तरफ़ से जो अपने शहरों में रहते हैं, कोई मुक़द्दमा तुम्हारे सामने आए, जो आपस के ख़ून से या शरी'अत और फ़रमान या आईन और 'अदालत से 'इलाक़ा रखता हो, तो तुम उनको आगाह कर देना कि वह ख़ुदावन्द का गुनाह न करें, जिससे तुम पर और तुम्हारे भाइयों पर ग़ज़ब नाज़िल हो। ये करो तो तुम से खता न होगी।
11और देखो, ख़ुदावन्द के सब मु'आमिलों में अमरियाह काहिन तुम्हारा सरदार है, और बादशाह के सब मु'आमिलों में ज़बदियाह बिन इस्माईल है, जो यहूदाह के ख़ान्दान का पेशवा है; और लावी भी तुम्हारे आगे सरदार होंगे। हौसले के साथ काम करना और ख़ुदावन्द नेकों के साथ हो।