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1और फ़िलिस्तियों ने ख़ुदा का संदूक़ छीन लिया और वह उसे इबने 'अज़र से अशदुद को ले गए ;

2और फ़िलिस्ती ख़ुदा के संदूक़ को लेकर उसे दजोन के घर में लाए और दजोन के पास उसे रख्खा ;

3और अशदूदी जब सुबह को सवेरे उठे, तो देखा कि दजोन ख़ुदावन्द के संदूक़ के आगे औंधे मुहँ ज़मीन पर गिरा पड़ा है |तब उन्होंने दजोन को लेकर उसी की जगह उसे फिर खड़ा कर दिया |

4फिर वह जो दूसरे दिन की सुबह को सवेरे उठे, तो देखा कि दजोन ख़ुदावन्द के संदूक़ के आगे औंधे मुहँ ज़मीन पर गिरा पड़ा है, और दजोन का सर और उसकी हथेलियाँ दहलीज़ पर कटी पड़ी थीं, सिर्फ़ दजोन का धड़ ही धड़ रह गया था ;

5तब दजोन के पुजारी और जितने दजोन के घर में आते हैं, आज तक अश्दूद में दजोन की दहलीज़ पर पाँव नहीं रखते |

6तब ख़ुदावन्द का हाथ अशदूदियों पर भारी हुआ,और वह उनको हलाक करने लगा, और अशदूद और उसकी 'इलाक़े के लोगों को गिल्टियों से मारा |

7और अशदूदियों ने जब यह हाल देखा तो कहने लगे, "कि इस्राईल के ख़ुदा का संदूक़ हमारे साथ न रहे, क्यूँकि उसका हाथ बुरी तरह हम पर और हमारे मा'बूद दजोन पर है|"

8तब उन्होंने फ़िलिस्तियों के सब सरदारों को बुलवा कर अपने यहाँ जमा' किया और कहने लगे, "हम इस्राईल के ख़ुदा के संदूक़ को क्या करें ?"उन्होंने जवाब दिया "कि इस्राईल के ख़ुदा का संदूक़ जात को पहुँचाया जाए|"इस लिए वह इस्राईल के ख़ुदा के संदूक़ को वहाँ ले गए|

9और जब वह उसे ले गए तो ऐसा हुआ कि ख़ुदावन्द का हाथ उस शहर के ख़िलाफ़ ऐसा उठा कि उस में बड़ी भारी हल चल मच गई;और उसने उस शहर के लोगों को छोटे से बड़े तक मारा और उनके गिल्टियाँ निकलने लगीं |

10जब उन्होंने ख़ुदा का संदूक़ 'अक़्रून को भेज दिया |और जैसे ही ख़ुदा का संदूक़ 'अक़्रूून को पहुँचा ,अक़्रूनी चिल्लाने लगे, "वह इस्राईल के ख़ुदा का संदूक़ हम में इस लिए लाए हैं ,कि हमको और हमारे लोगों को मरवा डालें|"

11तब उन्होंने फ़िलिस्तियों के सरदारों को बुलवा कर जमा' किया और कहने लगे, "कि इस्राईल के ख़ुदा कि संदूक़ को रवाना कर दो कि वह फिर अपनी जगह पर जाए ,और हमको और हमारे लोगों को मार डालने न पाए |"क्यूँकि वहाँ सारे शहर में मौत की हलचल मच गई थी, और ख़ुदा का हाथ वहाँ बहुत भारी हुआ |

12और जो लोग मरे नहीं वह गिल्टियों के मारे पड़े रहे, और शहर की फ़रियाद आसमान तक पहुँची |


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