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1और दाऊद नोब में अख़ीमलिक काहिन के पास आया ;और अख़ीमलिक दाऊद से मिलने को काँपता हुआ आया और उससे कहा ,"तू क्यूँ अकेला है ,और तेरे साथ कोई आदमी नहीं?"

2दाऊद ने अख़ीमलिक काहिन से कहा कि "बादशाह ने मुझे एक काम का हुक्म करके कहा है, कि जिस काम पर मैं तुझे भेजता हूँ ,और जो हुक्म मैंने तुझे दिया है वह किसी शख़्स पर ज़ाहिर न हो इस लिए मैंने जवानों को फुलानी फुलानी जगह बिठा ,दिया है |

3पस अब तेरे यहाँ क्या है ?मेरे हाथ में रोटियों के पाँच गिर्दे या जो कुछ मौजूद हो दे|"

4काहिन ने दाऊद को जवाब दिया मेरे यहाँ 'आम रोटियाँ तो नहीं पर पाक रोटियाँ हैं ;बशर्ते कि वह जवान 'औरतों से अलग रहे हों |"

5दाऊद ने काहिन को जवाब दिया "सच तो यह है कि तीन दिन से 'औरतें हमसे अलग रहीं हैं ,और अगर चे यह मा'मूली सफ़र है तोभी जब मैं चला था तब इन जवानों के बर्तन पाक थे ,तो आज तो ज़रूर ही वह बर्तन पाक होंगे |"

6तब काहिन ने पाक रोटी उसको दी क्यूँकि और रोटी वहाँ नहीं थी ,सिर्फ़ नज़र की रोटी थी ,जो ख़ुदावन्द के आगे से उठाई गई थी ताकि उसके बदले उस दिन जब वह उठाई जाए गर्म रोटी रख्खी जाए |

7और वहाँ उस दिन साऊल के खादिमों में से एक शख़्स ख़ुदावन्द के आगे रुका हुआ था ,उसका नाम अदोमी दोएग था |यह साऊल के चरवाहों का सरदार था |

8फिर दाऊद ने अख़ीमलिक से पूछा "क्या यहाँ तेरे पास कोई नेज़ह या तलवार नहीं ?क्यूँकि मैं अपनी तलवार और अपने हथियार अपने साथ नहीं लाया क्यूँकि बादशाह के काम की जल्दी थी |"

9उस काहिन ने कहा ,कि "फ़िलिस्ती जोलियत की तलवार जिसे तूने एला की वादी में क़त्ल किया कपड़े में लिपटी हुई अफ़ूद के पीछे रख्खी है ,अगर तु उसे लेना चाहता है तो ले ,उसके सिवा यहाँ कोई और नहीं है|"दाऊद ने कहा,"वैसे तो कोई है ही नहीं ,वही मुझे दे |"

10और दाऊद उठा ,और साऊल के ख़ौफ़ से उसी दिन भागा और जात के बादशाह अकीस के पास चला गया |

11और अकीस के मुलाज़िमों ने उससे कहा,"क्या यहीं उस मुल्क का बादशाह दाऊद नहीं ?क्या इसी के बारे में नाचते वक़्त गा गा कर उन्होंने आपस में नहीं कहा था कि साऊल ने तो हज़ारों को पर दाऊद ने लाखों को मारा?|"

12दाऊद ने यह बातें अपने दिल में रख्खीं और जात के बादशाह अकीस से निहायत डरा |

13इस लिए वह उनके आगे दूसरी चाल चला और उनके हाथ पड़ कर अपने को दीवाना सा बना लिया ,और फाटक के किवाड़ों पर लकीरें खींचने और अपने थूक को अपनी दाढ़ी पर बहाने लगा |

14तब अकीस ने अपने नौकरों से कहा,"लो यह आदमी तो दीवाना है ,तुम उसे मेरे पास क्यूँ लाए ?

15क्या मुझे दीवानों की जरूरत है जो तुम उसको मेरे पास लाए हो कि मेरे सामने दीवाना पन करे ?क्या ऐसा आदमी मेरे घर में आने पाएगा ?"


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