1और हन्ना ने दु'आ की और कहा, "मेरा दिल ख़ुदावन्द मैं ख़ुश है :मेरा सींग ख़ुदावन्द के तुफ़ैल से ऊँचा हुआ | मेरा मुँह मेरे दुश्मनों पर खुल गया है क्यूँकि मैं तेरी नजात से ख़ुश हूँ |
2"ख़ुदावन्द की तरह कोई पाक नहीं क्यूँकि तेरे सिवा और कोई है ही नहीं और न कोई चटटान है जो हमारे ख़ुदा की तरह हो
3इस क़दर ग़ुरूर से और बातें न करो और बड़ा बोल तुम्हारे मुहँ से न निकले ;क्यूँकि ख़ुदावन्द ख़ुदा ए 'अलीम है ,और 'आमाल का तोलने वाला है |
4ताक़तवरों की कमाने टूट गईं और जो लड़खड़ाते थे वह ताक़त से कमर बस्ता हुए |
5वह जो आसूदा थे रोटी की ख़ातिर मज़दूर बनें और जो भूके थे ऐसे न रहे, बल्कि जो बाँझ थी उस के साथ हुए , और जिसके पास बहुत बच्चे हैं वह घुलती जाती है |
6ख़ुदावन्द मारता है और जिलाता है ;वही क़ब्र मैं उतारता और उससे निकालता है |
7ख़ुदावन्द ग़रीब कर देता और दौलतमंद बनाता है ,वही पस्त करता और बुलंद भी करता है |
8वह ग़रीब को ख़ाक पर से उठाता, और कंगाल को घूरे में से निकाल खड़ा करता है ताकि इनको शहज़ादों के साथ बिठाए ,और जलाल के तख़्त का वारिस बनाए ;क्यूँकि ज़मीन के सुतून ख़ुदावन्द के हैं उसने दुनिया को उन ही पर क़ायम किया है |
9"वह अपने मुक्द्द्सों के पाँव को संभाले रहेगा ,पर शरीर अँधेरे मैं ख़ामोश किए जायेंगे क्यूँकि ताक़त ही से कोई फ़तह नहीं पाएगा |
10जो ख़ुदावन्द से झगड़ते हैं वह टुकड़े टुकड़े कर दिए जाएँगे ;वह उन के ख़िलाफ़ आस्मान में गरज़ेगा ख़ुदावन्द ज़मीन के किनारों का इंसाफ करेगा:वह अपने बादशाह को ताक़त बख़्शेगा ,और अपने मम्सूह के सींग को बुलंद करेगा "
11तब इल्क़ाना रामा को अपने घर चला गया ; और एली काहिन के सामने वह लड़का ख़ुदावन्द की ख़िदमत करने लगा |
12और एली के बेटे बहुत शरीर थे ;उन्होंने ख़ुदावन्द को न पहचाना |
13और कहिनों का दस्तूर लोगों के साथ यह था ,कि जब कोई शख़्स क़ुर्बानी करता था तो काहिन का नोंकर गोश्त उबालने के वक़त एक सह्शाखा काँटा अपने हाथ मैं लिए हुए आता था ‘;
14और उसको कढाह या दिग्चे या हांडे या हांड़ी में डालता और जितना गोश्त उस काँटे में लग जाता उसे काहिन अपने आप लेता था |यूँ ही वह सैला में सब इस्राईलियों से किया करते थे जो वहाँ आते थे
15बल्कि चर्बी जलाने से पहले काहिन का नोकर आ मौजूद होता ,और उस शख़्स से जो क़ुर्बानी पेश करता यह कहने लगता था, "काहिन के लिए कबाब के वास्ते गोश्त दे ,क्यूँकि वह तुझ से उबला हुआ गोश्त नहीं बल्कि कच्चा लेगा|"
16और अगर वह शख़्स यह कहता की अभी वह चर्बी को जरूर जलायेंगे तब जितना तेरा जी चाहे ले लेना "तो वह उसे जवाब देता नहीं तू मुझे अभी दे नही तो मैं छीन कर ले जाऊँगा|"
17इसलिए उन जवानों का गुनाह ख़ुदावन्द के सामने बहुत बड़ा था क्यूँकि लोग ख़ुदावन्द की क़ुर्बानी से नफ़रत करने लगे थे |
18लेकिन समुएल जो लड़का था ,कतान का अफ़ूद पहने हुए ख़ुदावन्द के सामने ख़िदमत करता था |
19और उस की माँ उस के लिए एक छोटा सा जुब्बा बनाकर साल ब साल लाती जब वह अपने शौहर के साथ सालाना क़ुर्बानी पेश करने आती थी |
20और एली ने इल्क़ाना और उस की बीवी को दु'आ दी और कहा, "ख़ुदावन्द तुझको इस 'औरत से उस क़र्ज़ के बदले में जो ख़ुदावन्द को दिया गया नस्ल दे|"फिर वह अपने घर गये |
21और ख़ुदावन्द ने हन्ना पर नज़र की और वह हामिला हुई,और उसके तीन बेटे और दो बेटियाँ हुई ,और वह लड़का समुएल ख़ुदावन्द के सामने बढ़ता गया |
22एली बहुत बुड्ढा हो गया था ,और उसने सब कुछ सुना कि उस के बेटे सारे इस्राईल से क्या किया करते हैं और उन 'औरतों से जो ख़ेमा-ए-इज्तिमा'अ के दरवाज़े पर ख़िदमत करती थी हम आग़ोशी करते हैं
23और उस ने उन से कहा, तुम ऐसा क्यूँ करते हो ?क्यूँकि मैं तुम्हारी बदजातियाँ पूरी क़ौम से सुनता हूँ ?.
24नहीं मेरे बेटों ये अच्छी बात नहीं जो मैं सुनता हूँ ; तुम ख़ुदावन्द के लोगों से नाफ़रमानी कराते हो |
25अगर एक आदमी दूसरे का गुनाह करे तो ख़ुदा उसका इंसाफ करेगा लेकिन अगर आदमी ख़ुदावन्द का गुनाह करे तो उस की शफ़ा'अत क़ौन करेगा?" बावजूद इसके उन्होंने अपने बाप का कहना न माना; क्यूँकि ख़ुदावन्द उनको मार डालना चाहता था |
26और वह लड़का समुएल बढ़ता गया और ख़ुदावन्द और इन्सान दोनों का मक़बूल था
27तब एक नबी एली के पास आया और उससे कहने लगा "ख़ुदा वन्द यूँ फ़रमाता है क्या मैं तेरे आबाई ख़ानदान पर जब वह मिस्र में फिर'औन के ख़ानदान की ग़ुलामी में था ज़ाहिर नहीं हुआ?
28और क्या मैंने उसे बनी इस्राईल के सब क़बीलों में से चुन न लिया ,ताकि वह मेरा काहिन हो और मेरे मज़बह के पास जाकर ख़ुशबू जलाये और मेरे सामने अफ़ूद पहने और क्या मैंने सब क़ुर्बानियाँ जो बनी इस्राईल आग से अदा करते है तेरे बाप को न दी?
29तब तुम क्यूँ मेरे उस ज़बीहे और हदिये को जिनका हुक्म मैंने अपने मस्कन में दिया लात मारते हो ?और क्यूँ तू अपने बेटों की मुझ से ज़्यादा 'इज़्ज़त करता है ,ताकि तुम मेरी क़ौम इस्राईल के अच्छे से अच्छे हदियों को खाकर मोटे बनो |
30इस लिए ख़ुदावन्द इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि मैंने तो कहा, था कि तेरा घराना और तेरे बाप का घराना हमेशा मेरे सामने चलेगा पर अब ख़ुदावन्द फ़रमाता है कि यह बात अब मुझ से दूर हो ,क्यूँकि वह जो मेरी 'इज़्ज़त करते है मैं उन की 'इज़्ज़त करूँगा पर वह जो मेरी हक़ारत करते है बेक़द्र होंगे
31देख वह दिन आते हैं कि मैं तेरा बाज़ू और तेरे बाप के घराने का बाज़ू काट डालूँगा ,कि तेरे घर में कोई बुड्ढा होने न पाएगा |
32और तू मेरे मस्कन की मुसीबत देखेगा बावजूद उस सारी दौलत के जो ख़ुदा इस्राईल को देगा और तेरे घर कभी कोई बुड्ढा होने न पाएगा
33और तेरे जिस आदमी को मैं अपने मज़बह से काट नहीं डालूँगा वह तेरी आँखों को घुलाने और तेरे दिल को दुख देने के लिए रहेगा और तेरे घर की सब बढ़ती अपनी भरी जवानी में मर मिटेगी |
34और जो कुछ तेरे दोनों बेटों हुफ़्नी फ़ीन्हास पर नाज़िल होगा वही तेरे लिए निशान ठहरेगा ;वह दोनों एक ही दिन मर जाएँगे |
35और मैं अपने लिए एक वफ़ादार काहिन पैदा करूँगा जो सब कुछ मेरी मर्ज़ी और मंशा के मुताबिक़ करेगा ,और मैं उस के लिए एक पायदार घर बनाऊँगा और वह हमेशा मेरे मम्सूह के आगे आगे चलेगा
36और ऐसा होगा की हर एक शख्स़ जो तेरे घर में बच रहेगा, एक टुकड़े चाँदी और रोटी के एक गिर्दे के लिए उस के सामने आकर सिज्दा करेगा और कहेगा, कि कहानत का कोई काम मुझे दीजिए ताकि मैं रोटी का निवाला खा सकूँ|"