1और साऊल ने अपने बेटे यूनतन और अपने सब ख़ादिमों से कहा ,कि दाऊद को मार डालो |
2लेकिन साऊल का बेटा यूनतन दाऊद से बहुत ख़ुश था इस लिए यूनतन ने दाऊद से कहा ,मेरा बाप तेरे क़त्ल की फ़िक्र में है ,इस लिए तू सुबह को अपना ख़याल रखना और किसी पौशीदा जगह में छेपे रहना |
3और में बाहर जाकर उस मैदान में जहाँ तू होगा अपने बाप के पास खड़ा हूँगा और अपने बाप से तेरी ज़रिए' बात करूँगा और अगर मुझे कुछ मा'लूम हो जाए तो तुझे बता दूँगा"|
4और यूनतन ने अपने बाप साऊल से दाऊद की ता'रीफ की और कहा,कि बादशाह अपने ख़ादिम दाऊद से बुराई न करे क्यूँकि उसने तेरा कुछ गुनाह नहीं किया बल्कि तेरे लिए उसके काम बहुत अच्छे रहे हैं |
5क्यूँकि उसने अपनी जान हथेली पर रख्खी और उस फ़िलिस्ती को क़त्ल किया और ख़ुदावन्द ने सब इस्राईलियों के लिए बड़ी फतह कराई,तूने यह देखा और ख़ुश हुआ ,पस तू किस लिए दाऊद को बे वजह क़त्ल करके बे गुनाह के ख़ून का मुजरिम बनना चाहता है?
6और साऊल ने यूनतन की बात सुनी और साऊल ने क़सम ख़ाकर कहा कि ख़ुदावन्द की हयात की क़सम है वह मारा नहीं जाएगा|
7और यूनतन ने दाऊद को बुलाया और उसने वह सब बातें उसको बताईं और यूनतन दाऊद को साऊल के पास लाया और वह पहले की तरह उसके पास रहने लगा |
8और फिर जंग हुई और दाऊद निकला और फ़िलिस्तियों से लड़ा और बड़ी ख़ूरेज़ी के साथ उनको क़त्ल किया और वह उसके सामने से भागे |
9और ख़ुदावन्द की तरफ़ से एक बुरी रूह साऊल पर जब वह अपने घर में अपना भाला अपने हाथ में लिए बैठा था, चढ़ी और दाऊद हाथ से बजा रहा था, |
10और साऊल ने चाहा ,कि दाऊद को दीवार के साथ भाले से छेद दे पर वह साऊल के आगे से हट गया ,और भाला दीवार में जा घुसा और दाऊद भागा और उस रात बच गया |
11और साऊल ने दाऊद के घर पर क़ासिद भेजे कि उसकी ताक में रहें और सुबह को उसे मार डालें ,इस लिए दाऊद की बीवी मीकल ने उससे कहा , "अगर आज की रात तू अपनी जान न बचाए तो कल मारा जाएगा|"
12और मीकल ने दाऊद को खिड़की से उतार दिया ,इस लिए वह चल दिया और भाग कर बच गया |
13और मीकल ने एक बुत को लेकर पलंग पर लिटा दिया ,और बकरियों के बाल का तकिया सिरहाने रखकर उसे कपड़ों से ढांक दिया |
14और जब साऊल ने दाऊद के पकड़ने को क़ासिद भेजे तो वह कहने लगी ,कि वह बीमार है|
15और साऊल ने क़ासिदों को भेजा कि दाऊद को देखें और कहा ,कि उसे पलंग समेत मेरे पास लाओ कि मैं उसे क़त्ल करूँ |
16और जब वह क़ासिद अंदर आए ,तो देखा कि पलंग पर बुत पड़ा है और उसके सिरहाने बकरियों के बाल का तकिया है |
17तब साऊल ने मीकल से कहा,"कि तू ने मुझ से क्यूँ ऐसी दगा ,की और मेरे दुश्मन को ऐसे जाने दिया कि वह बच निकला ?"मीकल ने साऊल को जवाब दिया ,कि वह मुझ से कहने लगा ,मुझे जाने दे ,मैं क्यूँ तुझे मार डालूँ ?
18और दाऊद भाग कर बच निकला और रामा में समुएल के पास आकर जो कुछ साऊल ने उससे किया था ,सब उसको बताया ,तब वह और समुएल दोनों नयोत में जाकर रहने लगे |
19और साऊल को ख़बर मिली कि दाऊद रामा के बीच नयोत में है |
20और साऊल ने दाऊद को पकड़ने को क़ासिद भेजे और उन्होंने जो देखा कि नबियों का मजमा' नबुव्वत कर रहा है और समुएल उनका सरदार बना खड़ा है तो ख़ुदा की रूह साऊल के क़ासिदों पर नाज़िल हुई और वह भी नबुव्वत करने लगे |
21और जब साऊल तक यह ख़बर पहूँची तो उसने और क़ासिद भेजे और वह भी नबुव्वत करने लगे और साऊल ने फिर तीसरी बार और क़ासिद भेजे और वह भी नबुव्वत करने लगे |
22तब वह ख़ुद रामा को चला और उस बड़े कुवें पर जो सीको में है पहूँच कर पूछने लगा कि समुएल और दाऊद कहाँ हैं ?और किसी ने कहा ,कि देख वह रामा के बीच नयोत में हैं|
23तब वह उधर रामा के नयोत की तरफ़ चला और ख़ुदा की रूह उस पर भी नाज़िल हुई और वह चलते चलते नबुव्वत करता हुआ ,रामा के नयोत में पहूँचा |
24और उसने भी अपने कपड़े उतारे और वह भी समुएल के आगे नबुव्वत करने लगा,और उस सारे दिन और सारी रात नंगा पड़ा रहा ,इस लिए यह कहावत चली " क्या साऊल भी नबियों में है?"