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1हे द्वीपों, मेरे सामने चुप रहो; देश-देश के लोग नया बल प्राप्‍त करें; वे समीप आकर बोलें; हम आपस में न्‍याय के लिये एक-दूसरे के समीप आएँ।

2किसने पूर्व दिशा से एक को उभारा है, जिसे वह धर्म के साथ अपने पाँव के पास बुलाता है? वह जातियों को उसके वश में कर देता और उसको राजाओं पर अधिकारी ठहराता है; वह अपनी तलवार से उन्‍हें धूल के समान, और अपने धनुष से उड़ाए हुए भूसे के समान कर देता है।

3वह उन्‍हें खदेड़ता और ऐसे मार्ग से, जिस पर वह कभी न चला था, बिना रोक-टोक आगे बढ़ता है।

4किसने यह काम किया है और आदि से पीढ़ियों को बुलाता आया है? मैं यहोवा, जो सबसे पहला, और अन्‍त के समय रहूँगा; मैं वहीं हूँ।

5द्वीप देखकर डरते हैं, पृथ्‍वी के दूर देश काँप उठे और निकट आ गए हैं।

6वे एक दूसरे की सहायता करते हैं और उनमें से एक अपने भाई से कहता है, “हियाव बाँध!”

7बढ़ई सोनार को और हथौड़े से बराबर करनेवाला निहाई पर मारनेवाले को यह कहकर हियाव बन्‍धा रहा है, “जोड़ तो अच्‍छी है,” अतः वह कील ठोंक-ठोंककर उसको ऐसा दृढ़ करता है कि वह स्‍थिर रहे।

8हे मेरे दास इस्राएल, हे मेरे चुने हुए याकूब, हे मेरे मित्र अब्राहम के वंश;

9तू जिसे मैंने पृथ्‍वी के दूर-दूर देशों से लिया और पृथ्‍वी की छोर से बुलाकर यह कहा, “तू मेरा दास है, मैंने तुझे चुना है और तजा नहीं;”

10मत डर, क्‍योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर-उधर मत ताक, क्‍योंकि मैं तेरा परमेश्‍वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूँगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूँगा।

11देख, जो तुझसे क्रोधित हैं, वे सब लज्‍जित होंगे; जो तुझसे झगड़ते हैं उनके मुँह काले होंगे और वे नाश होकर मिट जाएँगे।

12जो तुझसे लड़ते हैं उन्‍हें ढूँढने पर भी तू न पाएगा; जो तुझसे युद्ध करते हैं वे नाश होकर मिट जाएँगे।

13क्‍योंकि मैं तेरा परमेश्‍वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूँगा, “मत डर, मैं तेरी सहायता करूँगा।”

14हे कीड़े सरीखे याकूब, हे इस्राएल के मनुष्‍यों, मत डरो! यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरी सहयता करूँगा; इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ानेवाला है।

15देख, मैंने तुझे छुरीवाले दाँवने का एक नया और चोखा यन्‍त्र ठहराया है; तू पहाड़ों को दाँव-दाँवकर सूक्ष्म धूल कर देगा, और पहाड़ियों को तू भूसे के समान कर देगा।

16तू उनको फटकेगा, और पवन उन्‍हें उड़ा ले जाएगी, और आँधी उन्‍हें तितर-बितर कर देगी। परन्‍तु तू यहोवा के कारण मगन होगा, और इस्राएल के पवित्र के कारण बड़ाई मारेगा।

17जब दीन और दरिद्र लोग जल ढूँढने पर भी न पायें और उनका तालू प्‍यास के मारे सूख जाये; मैं यहोवा उनकी विनती सुनूँगा, मैं इस्राएल का परमेश्‍वर उनको त्‍याग न दूँगा।

18मैं मुण्‍डे टीलों से भी नदियाँ और मैदानों के बीच में सोते बहाऊँगा; मैं जंगल को ताल और निर्जल देश को सोते ही सोते कर दूँगा।

19मैं जंगल में देवदार, बबूल, मेंहदी, और जैतून उगाऊँगा; मैं अराबा में सनौवर, तिधार वृक्ष, और चीड़ इकट्ठे लगाऊँगा;

20जिससे लोग देखकर जान लें, और सोचकर पूरी रीति से समझ लें कि यह यहोवा के हाथ का किया हुआ और इस्राएल के पवित्र का सृजा हुआ है। मूर्तियों की निरर्थकता

21यहोवा कहता है, “अपना मुकद्दमा लड़ो,” याकूब का राजा कहता है, “अपने प्रमाण दो।”

22वे उन्‍हें देकर हमको बताएँ कि भविष्‍य में क्‍या होगा? पूर्वकाल की घटनाएँ बताओ कि आदि में क्या-क्या हुआ, जिससे हम उन्‍हें सोचकर जान सकें कि भविष्‍य में उनका क्‍या फल होगा; या होनेवाली घटनाएँ हमको सुना दो।

23भविष्‍य में जो कुछ घटेगा वह बताओ, तब हम मानेंगे कि तुम ईश्‍वर हो; भला या बुरा, कुछ तो करो कि हम देखकर चकित को जाएँ।

24देखो, तुम कुछ नहीं हो, तुमसे कुछ नहीं बनता; जो कोई तुम्‍हें चाहता है वह घृणित है।

25मैंने एक को उत्तर दिशा से उभारा, वह आ भी गया है; वह पूर्व दिशा से है और मेरा नाम लेता है; जैसा कुम्‍हार गीली मिट्टी को लताड़ता है, वैसा ही वह हाकिमों को कीच के समान लताड़ देगा।

26किसने इस बात को पहले से बताया था, जिससे हम यह जानते? किसने पूर्वकाल से यह प्रगट किया जिससे हम कहें कि वह सच्‍चा है? कोई भी बतानेवाला नहीं, कोई भी सुनानेवाला नहीं, तुम्‍हारी बातों का कोई भी सुनानेवाला नहीं है।

27मैं ही ने पहले सिय्‍योन से कहा, “देख, उन्‍हें देख,” और मैंने यरूशलेम को एक शुभ समाचार देनेवाला भेजा।

28मैंने देखने पर भी किसी को न पाया; उनमें कोई मन्‍त्री नहीं जो मेरे पूछने पर कुछ उत्तर दे सके।

29सुनो, उन सभों के काम अनर्थ हैं; उनके काम तुच्‍छ हैं, और उनकी ढली हुई मूर्त्तियाँ वायु और मिथ्‍या हैं।


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