Bible 2 India Mobile
[VER] : [HINDI]     [PL]  [PB] 
 <<  Isaiah 40 >> 

1तुम्‍हारा परमेश्‍वर यह कहता है, मेरी प्रजा को शान्‍ति दो, शान्‍ति!

2यरूशलेम से शान्‍ति की बातें कहो; और उससे पुकारकर कहो कि तेरी कठिन सेवा पूरी हुई है, तेरे अधर्म का दण्‍ड अंगीकार किया गया है: यहोवा के हाथ से तू अपने सब पापों का दूना दण्‍ड पा चुका है।

3किसी की पुकार सुनाई देती है, “जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्‍वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।

4हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊँचा-नीचा है वह चौरस किया जाए।

5तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्‍योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है।”

6बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, “प्रचार कर!” मैंने कहा, “मैं क्‍या प्रचार करूँ?” सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है।

7जब यहोवा की साँस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्‍देह प्रजा घास है।

8घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्‍तु हमारे परमेश्‍वर का वचन सदैव अटल रहेगा।

9हे सिय्‍योन को शुभ समाचार सुनानेवाली, ऊँचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनानेवाली, बहुत ऊँचे शब्‍द से सुना, ऊँचे शब्‍द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, “अपने परमेश्‍वर को देखो!”

10देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ आ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा; देखो, जो मजदूरी देने की है वह उसके पास है और जो बदला देने का है वह उसके हाथ में है।

11वह चरवाहे के समान अपने झुण्‍ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्‍चों को अँकवार में लिए रहेगा और दूध पिलानेवालियों को धीरे-धीरे ले चलेगा। इस्राएल का अतुलनीय परमेश्वर

12किसने महासागर को चुल्‍लू से मापा और किसके बित्ते से आकाश का नाप हुआ, किसने पृथ्‍वी की मिट्टी को नपुए में भरा और पहाड़ों को तराजू में और पहाड़ियों को काँटे में तौला है?

13किसने यहोवा की आत्‍मा को मार्ग बताया या उसका मन्‍त्री होकर उसको ज्ञान सिखाया है?

14उसने किससे सम्‍मति ली और किसने उसे समझाकर न्‍याय का पथ बता दिया और ज्ञान सिखाकर बुद्धि का मार्ग जता दिया है?

15देखो, जातियाँ तो डोल की एक बून्‍द या पलड़ों पर की धूल के तुल्‍य ठहरीं; देखो, वह द्वीपों को धूल के किनकों सरीखे उठाता है।

16लबानोन भी ईधन के लिये थोड़ा होगा और उसमें के जीव-जन्‍तु होमबलि के लिये बस न होंगे।

17सारी जातियाँ उसके सामने कुछ नहीं हैं, वे उसकी दृष्‍टि में लेश और शून्‍य से भी घट ठहरीं हैं।

18तुम परमेश्वर को किसके समान बताओगे और उसकी उपमा किससे दोगे?

19मूरत! कारीगर ढालता है, सोनार उसको सोने से मढ़ता और उसके लिये चाँदी की साँकलें ढालकर बनाता है।

20जो कंगाल इतना अर्पण नहीं कर सकता, वह ऐसा वृक्ष चुन लेता है जो न घुने; तब एक निपूर्ण कारीगर ढूँढकर मूरत खुदवाता और उसे ऐसा स्‍थिर कराता है कि वह हिल न सके।

21क्‍या तुम नहीं जानते? क्‍या तुमने नहीं सुना? क्‍या तुमको आरम्‍भ ही से नहीं बताया गया? क्‍या तुमने पृथ्‍वी की नींव पड़ने के समय ही से विचार नहीं किया?

22यह वह है जो पृथ्‍वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्‍डल पर विराजमान है; और पृथ्‍वी के रहनेवाले टिड्डी के तुल्‍य है; जो आकाश को मलमल के समान फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्‍बू ताना जाता है;

23जो बड़े-बड़े हाकिमों को तुच्‍छ कर देता है, और पृथ्‍वी के अधिकारियों को शून्‍य के समान कर देता है।

24वे रोपे ही जाते, वे बोए ही जाते, उनके ठूँठ भूमि में जड़ ही पकड़ पाते कि वह उन पर पवन बहाता और वे सूख जाते, और आँधी उन्‍हें भूसे के समान उड़ा ले जाती है।

25इसलिये तुम मुझे किसके समान बताओगे कि मैं उसके तुल्‍य ठहरूँ? उस पवित्र का यही वचन है।

26अपनी आँखें ऊपर उठाकर देखो, किसने इनको सिरजा? वह इन गणों को गिन-गिनकर निकालता, उन सबको नाम ले-लेकर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्‍यन्‍त बली है कि उनमें के कोई बिना आए नहीं रहता।

27हे याकूब, तू क्‍यों कहता है, हे इस्राएल तू क्‍यों बोलता है, “मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्‍वर मेरे न्‍याय की कुछ चिन्‍ता नहीं करता?”

28क्‍या तुम नहीं जानते? क्‍या तुमने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्‍वर और पृथ्‍वी भर का सृजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।

29वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ्य देता है।

30तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं;

31परन्‍तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्‍त करते जाएँगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।


  Share Facebook  |  Share Twitter

 <<  Isaiah 40 >> 


Bible2india.com
© 2010-2025
Help
Dual Panel

Laporan Masalah/Saran