Bible 2 India Mobile
[VER] : [HINDI]     [PL]  [PB] 
 <<  Isaiah 32 >> 

1देखो, एक राजा धर्म से राज्‍य करेगा, और राजकुमार न्‍याय से हुकूमत करेंगे।

2हर एक मानो आँधी से छिपने का स्‍थान, और बौछार से आड़ होगा; या निर्जल देश में जल के झरने, व तप्‍त भूमि में बड़ी चट्टान की छाया।

3उस समय देखनेवालों की आँखें धुँधली न होंगी, और सुननेवालों के कान लगे रहेंगे।

4उतावलों के मन ज्ञान की बातें समझेंगे, और तुतलानेवालों की जीभ फुर्ती से और साफ बोलेगी।

5मूढ़ फिर उदार न कहलाएगा और न कंजूस दानी कहा जाएगा।

6क्‍योंकि मूढ़ तो मूढ़ता ही की बातें बोलता और मन में अनर्थ ही गढ़ता रहता है कि वह अधर्म के काम करे और यहोवा के विरूद्ध झूठ कहे, भूखे को भूखा ही रहने दे और प्‍यासे का जल रोक रखे।

7छली की चालें बुरी होती हैं, वह दुष्‍ट युक्तियाँ निकालता है कि दरिद्र को भी झूठी बातों में लूटे जब कि वे ठीक और नम्रता से भी बोलते हों।

8परन्‍तु उदार मनुष्‍य उदारता ही की युक्तियाँ निकालता है, वह उदारता में स्‍थिर भी रहेगा। यरूशलेम की स्त्रियाँ

9हे सुखी स्‍त्रियों, उठकर मेरी सुनो; हे निश्‍चिन्‍त पुत्रियों, मेरे वचन की ओर कान लगाओ।

10हे निश्‍चिन्‍त स्‍त्रियों, वर्ष भर से कुछ ही अधिक समय में तुम विकल हो जाओगी; क्‍योंकि तोड़ने को दाखें न होंगी और न किसी भाँति के फल हाथ लगेंगे।

11हे सुखी स्‍त्रियों, थरथराओ, हे निश्‍चिन्‍त स्‍त्रियों, विकल हो; अपने-अपने वस्‍त्र उतारकर अपनी-अपनी कमर में टाट कसो।

12वे मनभाऊ खेतों और फलवन्‍त दाखलताओं के लिये छाती पीटेंगी।

13मेरे लोगों के वरन् प्रसन्न नगर के सब हर्ष भरे घरों में भी भाँति-भाँति के कटीले पेड़ उपजेंगे।

14क्‍योंकि राजभवन त्‍यागा जाएगा, कोलाहल से भरा नगर सुनसान हो जाएगा और पहाड़ी और उन पर के पहरूओं के घर सदा के लिये माँदे और जंगली गदहों का विहारस्‍थान और घरैलू पशुओं की चराई उस समय तक बने रहेंगे

15जब तक आत्‍मा ऊपर से हम पर उण्‍डेला न जाए, और जंगल फलदायक बारी न बने, और फलदायक बारी फिर वन न गिनी जाए।

16तब उस जंगल में न्‍याय बसेगा, और उस फलदायक बारी में धर्म रहेगा।

17और धर्म का फल शांति और उसका परिणाम सदा का चैन और निश्‍चिन्‍त रहना होगा।

18मेरे लोग शान्‍ति के स्‍थानों में निश्‍चिन्‍त रहेंगे, और विश्राम के स्‍थानों में सुख से रहेंगे।

19और वन के विनाश के समय ओले गिरेंगे, और नगर पूरी रीति से चौपट हो जाएगा।

20क्‍या ही धन्‍य हो तुम जो सब जलाशयों के पास बीच बोते, और बैलों और गदहों को स्‍वतन्‍त्रता से चराते हो।


  Share Facebook  |  Share Twitter

 <<  Isaiah 32 >> 


Bible2india.com
© 2010-2025
Help
Dual Panel

Laporan Masalah/Saran