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1जिस वर्ष में अश्‍शूर के राजा सर्गोन की आज्ञा से तर्तान ने अशदोद आकर उससे युद्ध किया और उसको ले भी लिया,

2उसी वर्ष यहोवा ने आमोस के पुत्र यशायाह से कहा, “जाकर अपनी कमर का टाट खोल और अपनी जूतियाँ उतार;” अतः उसने वैसा ही किया, और वह नंगा और नंगे पाँव घूमता फिरता था।

3तब यहोवा ने कहा, “जिस प्रकार मेरा दास यशायाह तीन वर्ष से उघाड़ा और नंगे पाँव चलता आया है, कि मिस्र और कूश के लिये चिन्‍ह और लक्षण हो,

4उसी प्रकार अश्‍शूर का राजा मिस्री और कूश के लोगों को बन्दी बना कर देश-निकाल करेगा, क्‍या लड़के क्‍या बूढे़, सभों को बन्दी बना कर उघाड़े और नंगे पाँव और नितम्‍ब खुले ले जाएगा, जिससे मिस्र लज्‍जित हो।

5तब वे कूश के कारण जिस पर उनकी आशा थी, और मिस्र के हेतु जिस पर वे फूलते थे व्‍याकुल और लज्‍जित हो जाएँगे।

6और समुद्र के इस पार के बसनेवाले उस समय यह कहेंगे, ‘देखो, जिन पर हम आशा रखते थे ओर जिनके पास हम अश्‍शूर के राजा से बचने के लिये भागने को थे उनकी ऐसी दशा हो गई है। तो फिर हम लोग कैसे बचेंगे’?”


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