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1“हे इस्राएल, सुन, आज तू यरदन पार इसलिये जानेवाला है, कि ऐसी जातियों को जो तुझसे बड़ी और सामर्थी हैं, और ऐसे बड़े नगरों को जिनकी शहरपनाह आकाश से बातें करती हैं, अपने अधिकार में ले ले।

2उनमें बड़े-बड़े और लम्बे-लम्बे लोग, अर्थात् अनाकवंशी रहते हैं, जिनका हाल तू जानता है, और उनके विषय में तूने यह सुना है, कि अनाकवशियों के सामने कौन ठहर सकता है?

3इसलिये आज तू यह जान ले, कि जो तेरे आगे भस्‍म करनेवाली आग के समान पार जानेवाला है वह तेरा परमेश्‍वर यहोवा है; और वह उनका सत्‍यानाश करेगा, और वह उनको तेरे सामने दबा देगा; और तू यहोवा के वचन के अनुसार उनको उस देश से निकालकर शीघ्र ही नष्‍ट कर डालेगा।(व्य 9:3 इब्रानियों 12:29)

4“जब तेरा परमेश्‍वर यहोवा उन्‍हें तेरे सामने से निकाल चुके तब यह न सोचना, कि यहोवा तेरे धर्म के कारण तुझे इस देश का अधिकारी होने को ले आया है, किन्‍तु उन जातियों की दुष्‍टता ही के कारण यहोवा उनको तेरे सामने से निकालता है।(व्य 9:4 रोमियो 10:6)

5तू जो उनके देश का अधिकारी होने के लिये जा रहा है, इसका कारण तेरा धर्म या मन की सीधाई नहीं है; तेरा परमेश्‍वर यहोवा जो उन जातियों को तेरे सामने से निकालता है, उसका कारण उनकी दुष्‍टता है, और यह भी कि जो वचन उसने अब्राहम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को शपथ खाकर दिया था, उसको वह पूरा करना चाहता है।

6“इसलिये यह जान ले कि तेरा परमेश्‍वर यहोवा, जो तुझे वह अच्‍छा देश देता है कि तू उसका अधिकारी हो, उसे वह तेरे धार्मिकता के कारण नहीं दे रहा है; क्‍योंकि तू तो एक हठीली जाति है।

7इस बात का स्‍मरण रख और कभी भी न भूलना, कि जंगल में तूने किस-किस रीति से अपने परमेश्‍वर यहोवा को क्रोधित किया; और जिस दिन से तू मिस्र देश से निकला है जब तक तुम इस स्‍थान पर न पहुँचे तब तक तुम यहोवा से बलवा ही बलवा करते आए हो।

8फिर होरेब के पास भी तुमने यहोवा को क्रोधित किया, और वह क्रोधित होकर तुम्‍हें नष्‍ट करना चाहता था।

9जब मैं उस वाचा के पत्‍थर की पटियाओं को जो यहोवा ने तुमसे बाँधी थी लेने के लिये पर्वत के ऊपर चढ़ गया, तब चालीस दिन और चालीस रात पर्वत ही के ऊपर रहा; और मैंने न तो रोटी खाई न पानी पिया।

10और यहोवा ने मुझे अपने ही हाथ की लिखी हुई पत्‍थर की दोनों पटियाओं को सौंप दिया, और वे ही वचन जिन्‍हें यहोवा ने पर्वत के ऊपर आग के मध्‍य में से सभा के दिन तुमसे कहे थे वे सब उन पर लिखे हुए थे।(व्य 9:10,11 प्रेरितों 7:38 2 कुरिन्थियों 3:3)

11और चालीस दिन और चालीस रात के बीत जाने पर यहोवा ने पत्‍थर की वे दो वाचा की पटियाएँ मुझे दे दीं।

12और यहोवा ने मुझसे कहा, ‘उठ, यहाँ से झटपट नीचे जा; क्‍योकिं तेरी प्रजा के लोग जिनको तू मिस्र से निकालकर ले आया है वे बिगड़ गए हैं; जिस मार्ग पर चलने की आज्ञा मैंने उन्‍हें दी थी उसको उन्होंने झटपट छोड़ दिया है; अर्थात् उन्होंने तुरन्‍त अपने लिये एक मूर्ति ढालकर बना ली है।’

13“फिर यहोवा ने मुझसे यह भी कहा, ‘मैंने उन लोगों को देख लिया, वे हठीली जाति के लोग हैं;

14इसलिये अब मुझे तू मत रोक, ताकि मैं उन्‍हें नष्‍ट कर डालूँ, और धरती के ऊपर से उनका नाम या चिन्‍ह तक मिटा डालूँ, और मैं उनसे बढ़कर एक बड़ी और सामर्थी जाति तुझी से उत्‍पन्न करूँगा।

15तब मैं उलटे पैर पर्वत से नीचे उतर चला, और पर्वत अग्‍नि से दहक रहा था और मेरे दोनों हाथों में वाचा की दोनों पटियाएँ थीं।

16और मैंने देखा कि तुमने अपने परमेश्‍वर यहोवा के विरूद्ध महापाप किया; और अपने लिये एक बछड़ा ढालकर बना लिया है, और तुरन्‍त उस मार्ग से जिस पर चलने की आज्ञा यहोवा ने तुमको दी थी उसको तुमने तज दिया।

17तब मैंने उन दोनों पटियाओं को अपने दोनो हाथों से लेकर फेंक दिया, और तुम्‍हारी आँखों के सामने उनको तोड़ डाला।

18तब तुम्‍हारे उस महापाप के कारण जिसे करके तुमने यहोवा की दृष्‍टि में बुराई की, और उसे रिस दिलाई थी, मैं यहोवा के सामने मुँह के बल गिर पड़ा, और पहले के समान, अर्थात् चालीस दिन और चालीस रात तक, न तो रोटी खाई और न पानी पिया।

19मैं तो यहोवा के उस कोप और जल-जलाहट से डर रहा था, क्‍योंकि वह तुमसे अप्रसन्न होकर तुम्‍हें सत्‍यानाश करने को था। परन्‍तु यहोवा ने उस बार भी मेरी सुन ली।(व्य 9:19 इब्रानियों 12:21)

20और यहोवा हारून से इतना कोपित हुआ कि उसे भी सत्‍यानाश करना चाहा; परन्‍तु उसी समय मैंने हारून के लिये भी प्रार्थना की।

21और मैंने वह बछड़ा जिसे बनाकर तुम पापी हो गए थे लेकर, आग में डालकर फूँक दिया; और फिर उसे पीस-पीसकर ऐसा चूर-चूरकर डाला कि वह धूल के समान जीर्ण हो गया; और उसकी उस राख को उस नदी में फेंक दिया जो पर्वत से निकलकर नीचे बहती थी।

22“फिर तबेरा, और मस्‍सा, और किब्रोतहत्तावा में भी तुमने यहोवा को रिस दिलाई थी।

23फिर जब यहोवा ने तुमको कादेशबर्ने से यह कहकर भेजा, ‘जाकर उस देश के जिसे मैंने तुम्‍हें दिया है अधिकारी हो जाओ,’ तब भी तुमने अपने परमेश्‍वर यहोवा की आज्ञा के विरूद्ध बलवा किया, और न तो उसका विश्‍वास किया, और न उसकी बात ही मानी।

24जिस दिन से मैं तुम्‍हें जानता हूँ उस दिन से तुम यहोवा से बलवा ही करते आए हो।

25“मैं यहोवा के सामने चालीस दिन और चालीस रात मुँह के बल पड़ा रहा, क्‍योंकि यहोवा ने कह दिया था, कि वह तुमको सत्‍यानाश करेगा।

26और मैंने यहोवा से यह प्रार्थना की, ‘हे प्रभु यहोवा, अपना प्रजारूपी निज भाग, जिनको तूने अपने महान् प्रताप से छुड़ा लिया है, और जिनको तूने अपने बलवन्‍त हाथ से मिस्र से निकाल लिया है, उन्‍हें नष्‍ट न कर।

27अपने दास अब्राहम, इसहाक, और याकूब को स्‍मरण कर; और इन लोगों की कठोरता, और दुष्‍टता, और पाप पर दृष्‍टि न कर,

28जिससे ऐसा न हो कि जिस देश से तू हमको निकालकर ले आया है, वहाँ के लोग कहने लगें, कि यहोवा उन्‍हें उस देश में जिसके देने का वचन उनको दिया था नहीं पहुँचा सका, और उनसे बैर भी रखता था, इसी कारण उसने उन्‍हें जंगल में निकालकर मार डाला है।

29ये लोग तेरी प्रजा और निज भाग हैं, जिनको तूने अपने बड़े सामर्थ्य और बलवन्‍त भुजा के द्वारा निकाल ले आया है।’


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