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1उसकी नींव पवित्र पर्वतों में है;

2और यहोवा सिय्‍योन के फाटकों से याकूब के सारे निवासों से बढ़कर प्रीति रखता है।

3हे परमेश्‍वर के नगर, तेरे विषय महिमा की बातें कही गई हैं। (सेला)

4मैं अपने जान-पहचानवालों से रहब और बाबेल की भी चर्चा करूँगा; पलिश्‍त, सोर और कूश को देखो, “यह वहाँ उत्‍पन्‍न हुआ था।”

5और सिय्‍योन के विषय में यह कहा जाएगा, “अमुक अमुक मनुष्‍य उस में उत्‍पन्‍न हुआ था;” और परमप्रधान आप ही उसको स्‍थिर रखेगा।

6यहोवा जब देश-देश के लोगों के नाम लिखकर गिन लेगा, तब यह कहेगा, “यह वहाँ उत्‍पन्‍न हुआ था।” (सेला)

7गवैये और नृतक दोनों कहेंगे, “हमारे सब सोते तुझी में पाए जाते हैं।”


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