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1परमेश्‍वर उठे, उसके शत्रु तितर-बितर हों; और उसके बैरी उसके सामने से भाग जाएँ।

2जैसे धुआँ उड़ जाता है, वैसे ही तू उनको उड़ा दे; जैसे मोम आग की आँच से पिघल जाता है, वैसे ही दुष्‍ट लोग परमेश्‍वर की उपस्‍थिति से नाश हों।

3परन्‍तु धर्मी आनन्‍दित हों; वे परमेश्‍वर के सामने प्रफुल्‍लित हों; वे आनन्‍द में मगन हों!

4परमेश्‍वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ; जो निर्जल देशों में सवार होकर चलता है, उसके लिये सड़क बनाओ; उसका नाम याह है, इसलिये तुम उसके सामने प्रफुल्‍लित हो!

5परमेश्‍वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्‍यायी है।

6परमेश्‍वर अनाथों का घर बसाता है; और बन्दियों को छुड़ाकर संपन्न करता है; परन्‍तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है।

7हे परमेश्‍वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे-आगे चलता था, जब तू निर्जल भूमि में सेना समेत चला, (सेला)

8तब पृथ्‍वी काँप उठी, और आकाश भी परमेश्‍वर के सामने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्‍वर, हाँ इस्राएल के परमेश्‍वर के सामने काँप उठा।(इब्रा. 12:26, न्या 5:4-5)

9हे परमेश्‍वर, तू ने बहुतायत की वर्षा की; तेरा निज भाग तो बहुत सूखा था, परन्‍तू तू ने उसको हरा-भरा किया है;

10तेरा झुण्‍ड उस में बसने लगा; हे परमेश्‍वर तू ने अपनी भलाई से दीन जन के लिये तैयारी की है।

11प्रभु आज्ञा देता है, तब शुभ समाचार सुनानेवालियों की बड़ी सेना हो जाती है।

12अपनी-अपनी सेना समेत राजा भागे चले जाते हैं, और गृहस्‍थिन लूट को बाँट लेती है।

13क्‍या तुम भेड़शालों के बीच लेट जाओगे? और ऐसी कबूतरी के समान होगे जिसके पंख चाँदी से और जिसके पर पीले सोने से मढ़े हुए हों?

14जब सर्वशक्तिमान ने उसमें राजाओं को तितर-बितर किया, तब मानो सल्‍मोन पर्वत पर हिम पड़ा।

15बाशान का पहाड़ परमेश्‍वर का पहाड़ है; बाशान का पहाड़ बहुत शिखरवाला पहाड़ है।

16परन्‍तु हे शिखरवाले पहाड़ों, तुम क्‍यों उस पर्वत को घूरते हो, जिसे परमेश्‍वर ने अपने वास के लिये चाहा है, और जहाँ यहोवा सदा वास किए रहेगा?

17परमेश्‍वर के रथ बीस हजार, वरन् हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्रस्‍थान में है।

18तू ऊँचे पर चढ़ा, तू लोगों को बँधुवाई में ले गया; तू ने मनुष्‍यों से, वरन् हठीले मनुष्‍यों से भी भेंटें लीं, जिस से याह परमेश्‍वर उनमें वास करे।(इफि. 4:8)

19धन्‍य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्‍वर है। (सेला)

20वही हमारे लिये बचानेवाला ईश्‍वर ठहरा; यहोवा प्रभु मृत्‍यु से भी बचाता है।

21निश्‍चय परमेश्‍वर अपने शत्रुओं के सिर पर, और जो अधर्म के मार्ग पर चलता रहता है, उसके बाल भरी खोपड़ी पर मार-मार कर उसे चूर करेगा।

22प्रभु ने कहा है, “मैं उन्‍हें बाशान से निकाल लाऊँगा, मैं उनको गहरे सागर के तल से भी फेर ले आऊँगा,

23कि तू अपने पाँव को लहू में डुबोए, और तेरे शत्रु तेरे कुत्तों का भाग ठहरें।”

24हे परमेश्वर तेरी गति देखी गई, मेरे ईश्‍वर, मेरे राजा की गति पवित्रस्‍थान में दिखाई दी है;

25गानेवाले आगे-आगे और तारवाले बाजों के बजानेवाले पीछे-पीछे गए, चारों ओर कुमारियाँ डफ बजाती थीं।

26सभाओं में परमेश्‍वर का, हे इस्राएल के सोते से निकले हुए लोगों, प्रभु का धन्‍यवाद करो।

27वहाँ उनका अध्‍यक्ष छोटा बिन्‍यामीन है, वहाँ यहूदा के हाकिम अपने अनुचरों समेत हैं, वहाँ जबूलून और नप्‍ताली के भी हाकिम हैं।

28तेरे परमेश्‍वर ने आज्ञा दी, कि तुझे सामर्थ्य मिले; हे परमेश्‍वर जो कुछ तू ने हमारे लिये किया है, उसे दृढ़ कर।

29तेरे मन्‍दिर के कारण जो यरूशलेम में हैं, राजा तेरे लिये भेंट ले आएँगे।

30नरकटों में रहनेवाले बनैले पशुओं को, साँडों के झुण्‍ड को और देश-देश के बछड़ों को झिड़क दे। वे चाँदी के टुकड़े लिये हुए प्रणाम करेंगे; जो लोगे युद्ध से प्रसन्‍न रहते हैं, उनको उसने तितर-बितर किया है।

31मिस्र से अधिकारी आएँगे; कूशी अपने हाथों को परमेश्‍वर की ओर फुर्ती से फैलाएँगे।

32हे पृथ्‍वी पर के राज्य-राज्य के लोगों परमेश्‍वर का गीत गाओ; प्रभु का भजन गाओ, (सेला)

33जो सब से ऊँचे सनातन स्‍वर्ग में सवार होकर चलता है; देखो वह अपनी वाणी सुनाता है, वह गम्‍भीर वाणी शक्तिशाली है।

34परमेश्ववर की सामर्थ्य की स्‍तुति करो, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसकी सामर्थ्य आकाशमण्‍डल में है।

35हे परमेश्‍वर, तू अपने पवित्रस्‍थानों में भययोग्‍य है, इस्राएल का ईश्‍वर ही अपनी प्रजा को सामर्थ्य और शक्ति का देनेवाला है। परमेश्‍वर धन्‍य है।


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