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1तब यहोवा ने मूसा से कहा, “सुन, मैं तुझे फ़िरौन के लिये परमेश्‍वर सा ठहराता हूँ; और तेरा भाई हारून तेरा नबी ठहरेगा।

2जो-जो आज्ञा मैं तुझे दूँ वही तू कहना, और हारून उसे फ़िरौन से कहेगा जिससे वह इस्राएलियों को अपने देश से निकल जाने दे।

3परन्तु मैं फ़िरौन के मन को कठोर कर दूँगा, और अपने चिन्‍ह और चमत्‍कार मिस्र देश में बहुत से दिखलाऊँगा।(प्रेरि 7:36)

4तौभी फ़िरौन तुम्‍हारी न सुनेगा; और मैं मिस्र देश पर अपना हाथ बढ़ाकर मिस्रियों को भारी दण्‍ड देकर अपनी सेना अर्थात् अपनी इस्राएली प्रजा को मिस्र देश से निकाल लूँगा।

5और जब मैं मिस्र पर हाथ बढ़ा कर इस्राएलियों को उनके बीच से निकालूँगा तब मिस्री जान लेंगे, कि मैं यहोवा हूँ।”

6तब मूसा और हारून ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार ही किया।

7तब जब मूसा और हारून फ़िरौन से बात करने लगे तब मूसा तो अस्‍सी वर्ष का था, और हारून तिरासी वर्ष का था।

8फिर यहोवा ने मूसा और हारून से इस प्रकार कहा,

9“जब फ़िरौन तुमसे कहे, ‘अपने प्रमाण का कोई चमत्‍कार दिखाओ,’ तब तू हारून से कहना, ‘अपनी लाठी को लेकर फ़िरौन के सामने डाल दे, कि वह अजगर बन जाए’।”

10तब मूसा और हारून ने फ़िरौन के पास जाकर यहोवा की आज्ञा के अनुसार किया; और जब हारून ने अपनी लाठी को फ़िरौन और उसके कर्मचारियों के सामने डाल दिया, तब वह अजगर बन गया।

11तब फ़िरौन ने पण्‍डितों और टोनहा करनेवालों को बुलवाया; और मिस्र के जादूगरों ने आकर अपने-अपने तंत्र-मंत्र से वैसा ही किया।

12उन्होंने भी अपनी-अपनी लाठी को डाल दिया, और वे भी अजगर बन गए। पर हारून की लाठी उनकी लाठियों को निगल गई।

13परन्‍तु फ़िरौन का मन और हठीला हो गया, और यहोवा के वचन के अनुसार उसने मूसा और हारून की बातों को नहीं माना।

14तब यहोवा ने मूसा से कहा, “फ़िरौन का मन कठोर हो गया है और वह इस प्रजा को जाने नहीं देता।

15इसलिये सबेरे के समय फ़िरौन के पास जा, वह तो जल की ओर बाहर आएगा; और जो लाठी सर्प बन गई थी, उसको हाथ में लिए हुए नील नदी के तट पर उससे भेंट करने के लिये खड़े रहना।

16और उससे इस प्रकार कहना, ‘इब्रियों के परमेश्‍वर यहोवा ने मुझे यह कहने के लिये तेरे पास भेजा है कि मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे कि जिससे वे जंगल में मेरी उपासना करें; और अब तक तूने मेरा कहना नहीं माना।

17यहोवा यों कहता है, इससे तू जान लेगा कि मैं ही परमेश्‍वर हूँ; देख, मै अपने हाथ की लाठी को नील नदी के जल पर मारूँगा, और जल लहू बन जाएगा,

18और जो मछलियाँ नील नदी में हैं वे मर जाएँगी, और नील नदी बसाने लगेगी, और नदी का पानी पीने के लिये मिस्रियों का जी न चाहेगा’।”

19फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून से कह कि अपनी लाठी लेकर मिस्र देश में जितना जल है, अर्थात् उसकी नदियाँ, नहरें, झीलें, और पोखरे, सब के ऊपर अपना हाथ बढ़ा कि उनका जल लहू बन जाए; और सारे मिस्र देश में काठ और पत्‍थर दोनों भाँति के जलपात्रों में लहू ही लहू हो जाएगा।”(प्रका 8:8, प्रका 11:6)

20तब मूसा और हारून ने यहोवा की आज्ञा ही के अनुसार किया, अर्थात् उसने लाठी को उठाकर फ़िरौन और उसके कर्मचारियों के देखते नील नदी के जल पर मारा, और नदी का सब जल लहू बन गया।

21और नील नदी में जो मछलियाँ थीं वे मर गई; और नदी से दुर्गन्‍ध आने लगी, और मिस्री लोग नदी का पानी न पी सके; और सारे मिस्र देश में लहू हो गया।(प्रका 16:3)

22तब मिस्र के जादूगरों ने भी अपने तंत्र-मंत्रो से वैसा ही किया; तौभी फ़िरौन का मन हठीला हो गया, और यहोवा के कहने के अनुसार उसने मूसा और हारून की न मानी।

23फ़िरौन ने इस पर भी ध्‍यान नहीं दिया, और मुँह फेरकर अपने घर में चला गया।

24और सब मिस्री लोग पीने के जल के लिये नील नदी के आस-पास खोदने लगे, क्‍योंकि वे नदी का जल नहीं पी सकते थे।

25जब से यहोवा ने नील नदी को मारा था तब से सात दिन हो चुके थे।


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