Bible 2 India Mobile
[VER] : [HINDI]     [PL]  [PB] 
 <<  Exodus 34 >> 

1फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “पहली तख्‍तियों के समान पत्‍थर की दो और तख्तियाँ गढ़ ले; तब जो वचन उन पहली तख्‍तियों पर लिखे थे, जिन्‍हें तूने तोड़ डाला, वे ही वचन मैं उन तख्‍तियों पर भी लिखूँगा।

2और सबेरे तैयार रहना, और भोर को सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे सामने खड़ा होना।

3तेरे संग कोई न चढ़ पाए, वरन् पर्वत भर पर कोई मनुष्‍य कहीं दिखाई न दे; और न भेड़-बकरी और गाय-बैल भी पर्वत के आगे चरने पाएँ।”

4तब मूसा ने पहली तख्‍तियों के समान दो और तख्तियाँ गढ़ी; और भोर को सबेरे उठकर अपने हाथ में पत्‍थर की वे दोनों तख्तियाँ लेकर यहोवा की आज्ञा के अनुसार पर्वत पर चढ़ गया।

5तब यहोवा ने बादल में उतरकर उसके संग वहाँ खड़ा होकर यहोवा नाम का प्रचार किया।

6और यहोवा उसके सामने होकर यों प्रचार करता हुआ चला, “यहोवा, यहोवा, ईश्‍वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्‍त, और अति करूणामय और सत्‍य,

7हज़ारों पीढ़ियों तक निरन्‍तर करूणा करनेवाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करनेवाला है, परन्‍तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्‍ड उनके बेटों वरन् पोतों और परपोतों को भी देनेवाला है।”

8तब मूसा ने फुर्ती कर पृथ्‍वी की ओर झुककर दण्‍डवत् की।

9और उसने कहा, “हे प्रभु, यदि तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो तो प्रभु, हम लोगों के बीच में होकर चले, ये लोग हठीले तो हैं, तौभी हमारे अधर्म और पाप को क्षमा कर, और हमें अपना निज भाग मानकर ग्रहण कर।” वाचा का दोहराया जाना

10उसने कहा, “सुन, मैं एक वाचा बाँधता हूँ। तेरे सब लोगों के सामने मैं ऐसे आश्‍चर्यकर्म करूँगा जैसा पृथ्‍वी पर और सब जातियों में कभी नहीं हुए; और वे सारे लोग जिनके बीच तू रहता है यहोवा के कार्य को देखेंगे; क्‍योंकि जो मैं तुम लोगों से करने पर हूँ वह भय योग्‍य काम है।

11जो आज्ञा मैं आज तुम्‍हें देता हूँ उसे तुम लोग मानना। देखो, मैं तुम्‍हारे आगे से एमोरी, कनानी, हित्ती, परिज्‍जी, हिब्‍बी, और यबूसी लोगों को निकालता हूँ।

12इसलिये सावधान रहना कि जिस देश में तू जानेवाला है उसके निवासियों से वाचा न बाँधना; कहीं ऐसा न हो कि वह तेरे लिये फंदा ठहरे।

13वरन् उनकी वेदियों को गिरा देना, उनकी लाठों को तोड़ डालना, और उनकी अशेरा नामक मूर्तियों को काट डालना;

14क्‍योंकि तुम्‍हें किसी दूसरे को ईश्‍वर करके दण्‍डवत् करने की आज्ञा नहीं, क्‍योंकि यहोवा जिसका नाम जलनशील है, वह जल उठनेवाला ईश्‍वर है,

15ऐसा न हो कि तू उस देश के निवासियों से वाचा बाँधे, और वे अपने देवताओं के पीछे होने का व्‍यभिचार करें, और उनके लिये बलिदान भी करें, और कोई तुझे नेवता दे और तू भी उसके बलिपशु का प्रसाद खाए,

16और तू उनकी बेटियों को अपने बेटों के लिये लाये, और उनकी बेटियाँ जो आप अपने देवताओं के पीछे होने का व्‍यभिचार करती है तेरे बेटों से भी अपने देवताओं के पीछे होने को व्‍यभिचार करवाएँ।

17“तुम देवताओं की मूर्त्तियाँ ढालकर न बना लेना।

18“अख़मीरी रोटी का पर्व मानना। उसमें मेरी आज्ञा के अनुसार आबीब महीने के नियत समय पर सात दिन तक अख़मीरी रोटी खाया करना; क्‍योंकि तू मिस्र से आबीब महीने में निकल आया।

19हर एक पहिलौठा मेरा है; और क्‍या बछड़ा, क्‍या मेमना, तेरे पशुओं में से जो नर पहिलौठे हों वे सब मेरे ही हैं।

20और गदही के पहिलौठे के बदले मेमना देकर उसको छुड़ाना, यदि तू उसे छुड़ाना न चाहे तो उसकी गर्दन तोड़ देना। परन्‍तु अपने सब पहिलौठे बेटों को बदला देकर छुड़ाना। मुझे कोई छूछे हाथ अपना मुँह न दिखाए।

21“छ: दिन तो परिश्रम करना, परन्‍तु सातवें दिन विश्राम करना; वरन् हल जोतने और लवने के समय में भी विश्राम करना।

22और तू सप्ताहों का पर्व मानना जो पहले लवे हुए गेहूँ का पर्व कहलाता है, और वर्ष के अन्‍त में बटोरन का भी पर्व मानना।

23वर्ष में तीन बार तेरे सब पुरूष इस्राएल के परमेश्‍वर प्रभु यहोवा को अपने मुँह दिखाएँ।

24मैं तो अन्‍यजातियों को तेरे आगे से निकालकर तेरी सीमाओं को बढ़ाऊँगा; और जब तू अपने परमेश्‍वर यहोवा को अपना मुँह दिखाने के लिये वर्ष में तीन बार आया करे, तब कोई तेरी भूमि का लालच न करेगा।

25“मेरे बलिदान के लहू को खमीर सहित न चढ़ाना, और न फसह के पर्व के बलिदान में से कुछ सबेरे तक रहने देना।

26अपनी भूमि की पहली उपज का पहला भाग अपने परमेश्‍वर यहोवा के भवन में ले आना। बकरी के बच्‍चे को उसकी माँ के दूध में न पकाना।”

27और यहोवा ने मूसा से कहा, “ये वचन लिख ले; क्‍योंकि इन्‍हीं वचनों के अनुसार मैं तेरे और इस्राएल के साथ वाचा बाँधता हूँ।”

28मूसा तो वहाँ यहोवा के संग चालीस दिन और रात रहा; और तब तक न तो उसने रोटी खाई और न पानी पिया। और उसने उन तख्‍तियों पर वाचा के वचन अर्थात् दस आज्ञाएँ लिख दीं।

29जब मूसा साक्षी की दोनों तख्तियाँ हाथ में लिये हुए सीनै पर्वत से उतरा आता था तब यहोवा के साथ बातें करने के कारण उसके चेहरे से किरणें निकल रही थी।, परन्‍तु वह यह नहीं जानता था कि उसके चेहरे से किरणें निकल रही हैं।

30जब हारून और सब इस्राएलियों ने मूसा को देखा कि उसके चेहरे से किरणें निकलती हैं, तब वे उसके पास जाने से डर गए।

31तब मूसा ने उनको बुलाया; और हारून मण्‍डली के सारे प्रधानों समेत उसके पास आया, और मूसा उनसे बातें करने लगा।

32इसके बाद सब इस्राएली पास आए, और जितनी आज्ञाएँ यहोवा ने सीनै पर्वत पर उसके साथ बात करने के समय दी थीं, वे सब उसने उन्‍हें बताईं।

33जब तक मूसा उनसे बात न कर चुका तब तक अपने मुँह पर ओढ़ना डाले रहा।

34और जब-जब मूसा भीतर यहोवा से बात करने को उसके सामने जाता तब-तब वह उस ओढ़नी को निकलते समय तक उतारे हुए रहता था; फिर बाहर आकर जो-जो आज्ञा उसे मिलतीं उन्‍हें इस्राएलियों से कह देता था।

35इस्राएली मूसा का चेहरा देखते थे कि उससे किरणें निकलती हैं; और जब तक वह यहोवा से बात करने को भीतर न जाता तब तक वह उस ओढ़नी को डाले रहता था।


  Share Facebook  |  Share Twitter

 <<  Exodus 34 >> 


Bible2india.com
© 2010-2025
Help
Dual Panel

Laporan Masalah/Saran