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1जब आदम अपनी पत्‍नी हव्‍वा के पास गया तब उसने गर्भवती होकर कैन को जन्‍म दिया और कहा, “मैंने यहोवा की सहायता से एक पुत्र को जन्म दिया है।”

2फिर वह उसके भाई हाबिल को भी जन्‍मी, हाबिल तो भेड़-बकरियों का चरवाहा बन गया, परन्‍तु कैन भूमि की खेती करने वाला किसान बना।

3कुछ दिनों के पश्‍चात् कैन यहोवा के पास भूमि की उपज में से कुछ भेंट ले आया। (यहू)दा 1:11

4और हाबिल भी अपनी भेड़-बकरियों के कई एक पहलौठे बच्‍चे भेंट चढ़ाने ले आया और उनकी चर्बी भेंट चढ़ाई;* तब यहोवा ने हाबिल और उसकी भेंट को तो ग्रहण किया, (इब्रा 11:4)

5परन्‍तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुँह पर उदासी छा गई।

6तब यहोवा ने कैन से कहा, “तू क्‍यों क्रोधित हुआ? और तेरे मुँह पर उदासी क्‍यों छा गई है?

7यदि तू भला करे, तो क्‍या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है, और उसकी लालसा तेरी और होगी, और तू उस पर प्रभुता करेगा।”

8तब कैन ने अपने भाई हाबिल से कुछ कहा; और जब वे मैदान में थे, तब कैन ने अपने भाई हाबिल पर चढ़कर उसे घात किया। (मत्ती 23:35,लूका 11:51,1 यूह. 3:12)

9तब यहोवा ने कैन से पूछा, “तेरा भाई हाबिल कहाँ है?” उसने कहा, “मालूम नहीं; क्‍या मैं अपने भाई का रखवाला हूँ?”

10उसने कहा, “तूने क्‍या किया है? तेरे भाई का लहू भूमि में से मेरी ओर चिल्‍लाकर मेरी दोहाई दे रहा है!

11इसलिये अब भूमि जिसने तेरे भाई का लहू तेरे हाथ से पीने के लिये अपना मुँह खोला है, उसकी ओर से तू शापित* है।

12चाहे तू भूमि पर खेती करे, तौभी उसकी पूरी उपज फिर तुझे न मिलेगी, और तू पृथ्‍वी पर भटकने वाला और भगोड़ा होगा।”

13तब कैन ने यहोवा से कहा, “मेरा दण्‍ड सहने से बाहर है।

14देख, तूने आज के दिन मुझे भूमि पर से निकाला है और मै तेरी दृष्‍टि की आड़ में रहूँगा और पृथ्‍वी पर भटकने वाला और भगोड़ा रहूँगा; और जो कोई मुझे पाएगा, मुझे घात करेगा।”

15इस कारण यहोवा ने उससे कहा, “जो कोई कैन को घात करेगा उससे सात गुणा पलटा लिया जाएगा।” और यहोवा ने कैन के लिये एक चिन्‍ह ठहराया ऐसा न हो कि कोई उसे पाकर मार डाले।

16तब कैन यहोवा के सम्‍मुख से निकल गया और नोद नामक देश में, जो अदन के पूर्व की ओर है, रहने लगा।

17जब कैन अपनी पत्‍नी के पास गया तब वह गर्भवती हुई और हनोक को जन्‍मी, फिर कैन ने एक नगर बसाया और उस नगर का नाम अपने पुत्र के नाम पर हनोक रखा।

18हनोक से ईराद उत्‍पन्‍न हुआ, और ईराद ने महूयाएल को जन्‍म दिया और महूयाएल ने मतूशाएल को, और मतूशाएल ने लेमेक को जन्‍म दिया।

19लेमेक ने दो स्त्रियाँ ब्‍याह लीं: जिनमें से एक का नाम आदा और दूसरी का सिल्‍ला है।

20आदा ने याबाल को जन्‍म दिया। वह उन लोगों का पिता था जो तम्बुओं में रहते थे और पशुओं का पालन करके जीवन निर्वाह करते थे।

21उसके भाई का नाम यूबाल था: वह उन लोगों का पिता था जो वीणा और बाँसुरी बजाते थे।

22और सिल्‍ला ने भी तूबल-कैन नाम एक पुत्र को जन्‍म दिया: वह पीतल और लोहे के सब धारवाले हथियारों का गढ़नेवाला हुआ। और तूबल-कैन की बहन नामा थी।

23लेमेक ने अपनी पत्‍नियों से कहा, “हे आदा और हे सिल्‍ला मेरी सुनो; हे लेमेक की पत्‍नियों, मेरी बात पर कान लगाओ: मैंने एक पुरूष को जो मुझे चोट लगाता था, अर्थात् एक जवान को जो मुझे घायल करता था, घात किया है।

24जब कैन का पलटा सातगुणा लिया जाएगा। तो लेमेक का सतहत्तर गुणा लिया जाएगा।”

25और आदम अपनी पत्‍नी के पास फिर गया; और उसने एक पुत्र को जन्‍म दिया और उसका नाम यह कह कर शेत रखा, कि “परमेश्‍वर ने मेरे लिये हाबिल के बदले, जिसको कैन ने घात किया, एक और वंश ठहरा दिया है।” (लूका 3:36-38,1 कुरि 11:7)

26और शेत के भी एक पुत्र उत्‍पन्‍न हुआ और उसने उसका नाम एनोश रखा। उसी समय से लोग यहोवा से प्रार्थना करने लगे।


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