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1फिर यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

2“इस्राएलियों से कहो कि जितने पशु पृथ्‍वी पर हैं उन सभों में से तुम इन जीवधारियों का मांस खा सकते हो।(इब्रा. 9:10)

3पशुओं में से जितने चिरे या फटे खुर के होते हैं और पागुर करते हैं उन्‍हें खा सकते हो।

4परन्‍तु पागुर करनेवाले या फटे खुरवालों में से इन पशुओं को न खाना, अर्थात् ऊँट, जो पागुर तो करता है परन्‍तु चिरे खुर का नहीं होता, इसलिये वह तुम्‍हारे लिये अशुद्ध ठहरा है।

5और शापान, जो पागुर तो करता है परन्‍तु चिरे खुर का नहीं होता, वह भी तुम्‍हारे लिये अशुद्ध है।

6और खरहा, जो पागुर तो करता है परन्‍तु चिरे खुर का नहीं होता, इसलिये वह भी तुम्‍हारे लिये अशुद्ध है।

7और सूअर, जो चिरे अर्थात् फटे खुर का होता तो है परन्‍तु पागुर नहीं करता, इसलिये वह तुम्‍हारे लिये अशुद्ध है।

8इनके मांस में से कुछ न खाना, और इनकी लोथ को छूना भी नहीं; ये तो तुम्‍हारे लिये अशुद्ध है।

9फिर जितने जलजन्‍तु हैं उनमें से तुम इन्‍हें खा सकते हों, अर्थात् समुद्र या नदियों के जल जन्‍तुओं में से जितनों के पंख और चोंयेटे होते हैं उन्‍हें खा सकते हो।

10और जलचरी प्राणियों में से जितने जीवधारी बिना पंख और चोंयेटे के समुद्र या नदियों में रहते हैं वे सब तुम्‍हारे लिये घृणित हैं।

11वे तुम्‍हारे लिये घृणित ठहरें; तुम उनके मांस में से कुछ न खाना, और उनकी लोथों को अशुद्ध जानना।

12जल में जिस किसी जन्‍तु के पंख और चोंयेटे नहीं होते वह तुम्‍हारे लिये अशुद्ध है।

13“फिर पक्षियों में से इनको अशुद्ध जानना, ये अशुद्ध होने के कारण खाए न जाएँ, अर्थात् उकाब, हड़फोड़, कुरर,

14चील, और भाँति-भाँति की बाज,

15और भाँति-भाँति के सब काग,

16शुतुर्मुर्ग, तखमास, जलकुक्‍कुट, और भाँति-भाँति के बाज,

17हवासिल, हाड़गील, उल्‍लू,

18राजहँस, धनेश, गिद्ध,

19लगलग, भाँति-भाँति के बगुले, टिटीहरी और चमगादड़।

20“जितने पंखवाले चार पाँवों के बल चलते हैं वे सब तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं।

21पर रेंगनेवाले और पंखवाले जो चार पाँवों के बल चलते हैं, जिनके भूमि पर कूदने फाँदने को टाँगे होती हैं उनको तो खा सकते हो।

22वे ये हैं, अर्थात् भाँति-भाँति की टिड्डी, भाँति-भाँति के फनगे, भाँति-भाँति के झिंगुर, और भाँति-भाँति के टिड्डे।

23परन्‍तु और सब रेंगनेवाले पंखवाले जो चार पाँव वाले होते हैं वे तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं।

24“इनके कारण तुम अशुद्ध ठहरोगे; जिस किसी से इनकी लोथ छू जाए वह साँझ तक अशुद्ध ठहरे।

25और जो कोई इनकी लोथ में का कुछ भी उठाए वह अपने वस्‍त्र धोए और साँझ तक अशुद्ध रहे।(इब्रा. 9:10)

26फिर जितने पशु चिरे खुर के होते है। परन्‍तु न तो बिलकुल फटे खुर और न पागुर करनेवाले हैं वे तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं; जो कोई उन्‍हें छूए वह अशुद्ध ठहरेगा।

27और चार पाँव के बल चलनेवालों में से जितने पंजों के बल चलते हैं वे सब तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं; जो कोई उनकी लोथ छूए वह साँझ तक अशुद्ध रहे।

28और जो कोई उनकी लोथ उठाए वह अपने वस्‍त्र धोए और साँझ तक अशुद्ध रहे; क्‍योंकि वे तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं।

29और जो पृथ्‍वी पर रेंगते हैं उनमें से ये रेंगनेवाले तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं, अर्थात् नेवला, चूहा, और भाँति-भाँति के गोह,

30और छिपकली, मगर, टिकटिक, सांडा, और गिरगिटान।

31सब रेंगनेवालों में से ये ही तुम्‍हारे लिये अशुद्ध हैं; जो कोई इनकी लोथ छूए वह साँझ तक अशुद्ध रहे।

32और इनमें से किसी की लोथ जिस किसी वस्‍तु पर पड़ जाए वह भी अशुद्ध ठहरे, चाहे वह काठ का कोई पात्र हो, चाहे वस्‍त्र, चाहे खाल, चाहे बोरा, चाहे किसी काम का कैसा ही पात्र आदि क्‍यों न हो; वह जल में डाला जाए, और साँझ तक अशुद्ध रहे, तब शुद्ध समझा जाए।

33और यदि मिट्टी का कोई पात्र हो जिसमें इन जन्‍तुओं में से कोई पड़े, तो उस पात्र में जो कुछ हो वह अशुद्ध ठहरे, और पात्र को तुम तोड़ डालना।

34उसमें जो खाने के योग्‍य भोजन हो, जिसमें पानी का छुआव हों वह सब अशुद्ध ठहरे; फिर यदि ऐसे पात्र में पीने के लिये कुछ हो तो वह भी अशुद्ध ठहरे।

35और यदि इनकी लोथ में का कुछ तंदूर या चूल्‍हे पर पड़े तो वह भी अशुद्ध ठहरे, और तोड़ डाला जाए; क्‍योंकि वह अशुद्ध हो जाएगा, वह तुम्‍हारे लिये भी अशुद्ध ठहरे।

36परन्‍तु सोता या तालाब जिसमें जल इकट्ठा हो वह तो शुद्ध ही रहे; परन्‍तु जो कोई इनकी लोथ को छूए वह अशुद्ध ठहरे।

37और यदि इनकी लोथ में का कुछ किसी प्रकार के बीज पर जो बोने के लिये हो पड़े, तो वह बीज शुद्ध रहे;

38पर यदि बीज पर जल डाला गया हो और पीछे लोथ में का कुछ उस पर पड़ जाए, तो वह तुम्‍हारे लिये अशुद्ध ठहरे।

39“फिर जिन पशुओं के खाने की आज्ञा तुमको दी गई है यदि उनमें से कोई पशु मरे, तो जो कोई उसकी लोथ छूए वह साँझ तक अशुद्ध रहे।

40और उसकी लोथ में से जो कोई कुछ खाए वह अपने वस्‍त्र धोए और साँझ तक अशुद्ध रहे; और जो कोई उसकी लोथ उठाए वह भी अपने वस्‍त्र धोए और साँझ तक अशुद्ध रहे।

41“सब प्रकार के पृथ्‍वी पर रेंगनेवाले जन्‍तु घिनौने हैं; वे खाए न जाएँ।

42पृथ्‍वी पर सब रेंगनेवालों में से जितने पेट या चार पाँवों के बल चलते हैं, या अधिक पाँव वाले होते हैं, उन्‍हें तुम न खाना; क्‍योंकि वे घिनौने हैं।

43तुम किसी प्रकार के रेंगनेवाले जन्‍तु के द्वारा अपने आप को घिनौना न करना; और न उनके द्वारा अपने को अशुद्ध करके अपवित्र ठहराना।

44क्‍योंकि मैं तुम्‍हारा परमेश्‍वर यहोवा हूँ; इस कारण अपने को शुध्‍द करके पवित्र बने रहो, क्‍योंकि मैं पवित्र हूँ । इसलिये तुम किसी प्रकार के रेंगनेवाले जन्‍तु के द्वारा जो पृथ्‍वी पर चलता है अपने आप को अशुद्ध न करना।(1 पत. 1:16)

45क्‍योंकि मैं वह यहोवा हूँ जो तुम्‍हें मिस्र देश से इसलिये निकाल ले आया हूँ कि तुम्‍हारा परमेश्‍वर ठहरूँ; इसलिये तुम पवित्र बनो, क्‍योंकि मैं पवित्र हूँ।”

46पशुओं, पक्षियों, और सब जलचरी प्राणियों, और पृथ्‍वी पर सब रेंगनेवाले प्राणियों के विषय में यही व्‍यवस्‍था है,

47कि शुद्ध अशुद्ध और भक्ष्य और अभक्ष्य जीवधारियों में भेद किया जाए।


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