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1“चलो, हम यहोवा की ओर फिरें; क्‍योंकि उसी ने फाड़ा, और वही चंगा भी करेगा; उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बाँधेगा।

2दो दिन के बाद वह हम को जिलाएगा; और तीसरे दिन वह हमको उठाकर खड़ा करेगा; तब हम उसके सम्‍मुख जीवित रहेंगे। (लूका 24:46, 1 कुरि 15:4)

3आओ, हम ज्ञान ढूँढ़े, वरन यहोवा का ज्ञान प्राप्‍त करने के लिये यत्‍न भी करें; क्‍योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का सा निश्‍चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन बरसात के अन्‍त की वर्षा के समान जिस से भूमि सिंचती है।”

4हे एप्रैम, मैं तुझ से क्‍या करूँ? हे यहूदा, मैं तुझ से क्‍या करूँ? तुम्‍हारा स्‍नेह तो भोर के मेघ के नाईं, और सवेरे उड़ जानेवाली ओस के नाईं है।

5इस कारण मैं ने भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा मानो उन पर कुल्‍हाड़ी चलाकर उन्‍हें काट डाला, और अपने वचनों से उनको घात किया, और मेरा न्‍याय प्रकाश की नाईं चमकता है। ( इफिसियों 6:17)

6क्‍योंकि मैं बलिदान से नहीं, स्‍थिर प्रेम ही से प्रसन्न होता हूँ, और होमबलियों से अधिक यह चाहता हूँ कि लोग परमेश्‍वर का ज्ञान रखें। (मत्ती. 9:13,मत्ती. 12:7,मर 12:33)

7परन्‍तु उन लोगों ने आदम की नाईं वाचा को तोड़ दिया; उन्‍हों ने वहाँ मुझ से विश्‍वासघात किया है।

8गिलाद नाम गढ़ी तो अनर्थकारियों से भरी है, वह खून से भरी हुई है।

9जैसे डाकुओं के दल किसी की घात में बैठते हैं, वैसे ही याजकों का दल शकेम के मार्ग में वध करता है, वरन उन्‍हों ने महापाप भी किया है।

10इस्राएल के घराने में मैं ने रोएँ खड़े होने का कारण देखा है; उस में एप्रैम का छिनाला और इस्राएल की अशुद्धता पाई जाती है।

11और हे यहूदा, जब मैं अपनी प्रजा को बंधुआई से लौटा ले आऊँगा, उस समय के लिये तेरे निमित्त भी बदला ठहराया हुआ है।


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