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1हे इस्राएल, अपने परमेश्‍वर यहोवा के पास लौट आ, क्‍योंकि तू ने अपने अधर्म के कारण ठोकर खाई है।

2बातें सीखकर** और यहोवा की ओर फिरकर, उससे कह, “सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हम को ग्रहण कर; तब हम धन्‍यवाद रूपी बलि चढ़ाएंगे। (इब्रा 13:15)

3अश्‍शूर हमारा उद्धार न करेगा, हम घोड़ों पर सवार न होंगे; और न हम फिर अपनी बनाई हुई वस्‍तुओं से कहेंगे, ‘तुम हमारे ईश्‍वर हो;’ क्‍योंकि अनाथ पर तू ही दया करता है।”

4मैं उनकी भटक जाने की आदत को दूर करूँगा; मैं सेंतमेंत उन से प्रेम करूँगा, क्‍योंकि मेरा क्रोध उन पर से उतर गया है।

5मैं इस्राएल के लिये ओस के नाई हूँगा; वह सोसन की नाई फूले-फलेगा, और लबानोन की नाई जड़ फैलाएगा।

6उसकी जड़ से पौधे फूटकर निकलेंगे; उसकी शोभा जलपाई की सी, और उसकी सुगन्‍ध लबानोन की सी होगी।

7जो उसकी छाया में बैठेंगे, वे अन्न की नाई बढ़ेंगे, वे दाखलता की नाई फूले-फलेंगे; और उसकी कीर्ति लबानोन के दाखमधु की सी होगी।

8एप्रैम कहेगा, “मूरतों से अब मेरा और क्‍या काम?” मैं उसकी सुनकर उस पर दृष्‍टि बनाए रखूँगा। मैं हरे सनौवर सा हूँ; मुझी से तू फल पाया करेगा।

9जो बुद्धिमान हो, वही इन बातों को समझेगा; जो प्रवीण हो, वही इन्‍हें बूझ सकेगा; क्‍योंकि यहोवा के मार्ग सीधे हैं, और धर्मी उन में चलते रहेंगे, परन्‍तु अपराधी उन में ठोकर खाकर गिरेंगे।


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