Bible 2 India Mobile
[VER] : [HINDI]     [PL]  [PB] 
 <<  Numbers 20 >> 

1पहले महीने में सारी इस्राएली मण्‍डली के लोग सीनै नामक जंगल में आ गए, और कादेश में रहने लगे; और वहाँ मरियम मर गई, और वहीं उसको मिट्टी दी गई।

2वहाँ मण्‍डली के लोगों के लिये पानी न मिला; इसलिये वे मूसा और हारून के विरूद्ध इकट्ठे हुए।

3और लोग यह कहकर मूसा से झगड़ने लगे, “भला होता कि हम उस समय ही मर गए होते जब हमारे भाई यहोवा के सामने मर गए!

4और तुम यहोवा की मण्‍डली को इस जंगल में क्‍यों ले आए हो, कि हम अपने पशुओं समेत यहाँ मर जाए?

5और तुमने हमको मिस्र से क्‍यों निकालकर इस बुरे स्‍थान में पहुँचाया है? यहाँ तो बीच, या अंजीर, या दाखलता, या अनार, कुछ नहीं है, यहाँ तक कि पीने को कुछ पानी भी नहीं है।”(इब्रा. 3:8)

6तब मूसा और हारून मण्‍डली के सामने से मिलापवाले तम्‍बू के द्वार पर जाकर अपने मुँह के बल गिरे। और यहोवा का तेज उनको दिखाई दिया।

7तब यहोवा ने मूसा से कहा,

8“उस लाठी को ले, और तू अपने भाई हारून समेत मण्‍डली को इकट्ठा करके उनके देखते उस चट्टान से बातें कर, तब वह अपना जल देगी; इस प्रकार से तू चट्टान में से उनके लिये जल निकाल कर मण्‍डली के लोगों और उनके पशुओं को पिला।”

9यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार मूसा ने उसके सामने से लाठी को ले लिया।

10और मूसा और हारून ने मण्‍डली को उस चट्टान के सामने इकट्ठा किया, तब मूसा ने उससे कह, “हे दंगा करनेवालो, सुनो; क्‍या हमको इस चट्टान में से तुम्‍हारे लिये जल निकालना होगा?”

11तब मूसा ने हाथ उठाकर लाठी चट्टान पर दो बार मारी; और उसमें से बहुत पानी फूट निकला, और मण्‍डली के लोग अपने पशुओं समेत पीने लगे।(1 कुरि. 10:4)

12परन्‍तु मूसा और हारून से यहोवा ने कहा, “तुमने जो मुझ पर विश्‍वास नहीं किया, और मुझे इस्राएलियों की दृष्‍टि में पवित्र नहीं ठहराया, इसलिये तुम इस मण्‍डली को उस देश में पहुँचाने न पाओगे जिसे मैंने उन्‍हें दिया है।”

13उस सोते का नाम मरीबा पड़ा, क्‍योंकि इस्राएलियों ने यहोवा से झगड़ा किया था, और वह उनके बीच पवित्र ठहराया गया।

14फिर मूसा ने कादेश से एदोम के राजा के पास दूत भेजे, “तेरा भाई इस्राएल यों कहता है, कि हम पर जो-जो क्‍लेश पड़े हैं वह तू जानता होगा;

15अर्थात् यह कि हमारे पुरखा मिस्र में गए थे, और हम मिस्र में बहुत दिन रहे; और मिस्रियों ने हमारे पुरखाओं के साथ और हमारे साथ भी बुरा बर्ताव किया;

16परन्‍तु जब हमने यहोवा की दोहाई दी तब उसने हमारी सुनी, और एक दूत को भेजकर हमें मिस्र से निकाल ले आया है; इसलिये अब हम कादेश नगर में हैं जो तेरी सीमा ही पर है।

17अतः हमें अपने देश में से होकर जाने दे। हम किसी खेत या दाख की बारी से होकर न चलेंगे, और कूओं का पानी न पीएँगे; सड़क-सड़क होकर चले जाएँगे, और जब तक तेरे देश से बाहर न हो जाएँ, तब तक न दाहिने न बाएँ मुड़ेंगे।”

18परन्‍तु एदोमियों ने उसके पास कहला भेजा, “तू मेरे देश में से होकर मत जा, नहीं तो मैं तलवार लिये हुए तेरा सामना करने को निकलूँगा।”

19इस्राएलियों ने उसके पास फिर कहला भेजा, “हम सड़क ही सड़क चलेंगे, और यदि हम और हमारे पशु तेरा पानी पीएँ, तो उसका दाम देंगे, हमको और कुछ नहीं, केवल पाँव-पाँव चलकर निकल जाने दे।”

20परन्‍तु उसने कहा, “तू आने न पाएगा।” और एदोम बड़ी सेना लेकर भुजबल से उसका सामना करने को निकल आया।

21इस प्रकार एदोम ने इस्राएल को अपने देश के भीतर से होकर जाने देने से इन्‍कार किया; इसलिये इस्राएल उसकी ओर से मुड़ गए।

22तब इस्राएलियों की सारी मण्‍डली कादेश से कूच करके होर नामक पहाड़ के पास आ गई।

23और एदोम देश की सीमा पर होर पहाड़ में यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

24“हारून अपने लोगों में जा मिलेगा; क्‍योंकि तुम दोनो ने जो मरीबा नामक सोते पर मेरा कहना छोड़कर मुझ से बलवा किया है, इस कारण वह उस देश में जाने न पाएगा जिसे मैंने इस्राएलियों को दिया है।

25इसलिये तू हारून और उसके पुत्र एलीआज़ार को होर पहाड़ पर ले चल;

26और हारून के वस्‍त्र उतारकर उसके पुत्र एलीआज़ार को पहना; तब हारून वहीं मरकर अपने लोगों में जा मिलेगा।”

27यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार मूसा ने किया; वे सारी मण्‍डली के देखते होर पहाड़ पर चढ़ गए।

28तब मूसा ने हारून के वस्‍त्र उतारकर उसके पुत्र एलीआज़ार को पहनाए और हारून वहीं पहाड़ की चोटी पर मर गया। तब मूसा और एलीआज़ार पहाड़ पर से उतर आए।

29और जब इस्राएल की सारी मण्‍डली ने देखा कि हारून का प्राण छूट गया है, तब इस्राएल के सब घराने के लोग उसके लिये तीस दिन तक रोते रहे।


  Share Facebook  |  Share Twitter

 <<  Numbers 20 >> 


Bible2india.com
© 2010-2025
Help
Dual Panel

Laporan Masalah/Saran