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1तीसरे दिन जब दाऊद अपने जनों समेत सिकलग पहुँचा, तब उन्होंने क्‍या देखा, कि अमालेकियों ने दक्षिण देश और सिकलग पर चढ़ाई की। और सिकलग को मार के फूंक दिया,

2और उसमें की स्‍त्री आदि छोटे बड़े जितने थे, सब को बन्‍धुआई में ले गए; उन्होंने किसी को मार तो नहीं डाला, परन्‍तु सभों को लेकर अपना मार्ग लिया।

3इसलिये जब दाऊद अपने जनों समेत उस नगर में पहुँचा, तब नगर तो जला पड़ा था, और स्‍त्रियाँ और बेटे-बेटियाँ बन्‍धुआई में चली गई थीं।

4तब दाऊद और वे लोग जो उसके साथ थे चिल्‍लाकर इतना रोए, कि फिर उन में रोने की शक्ति न रही।

5और दाऊद की दो स्‍त्रियाँ, यिज्रेली अहीनोअम, और कर्मेली नाबाल की स्‍त्री अबीगैल, बन्‍धुआई में गई थीं।

6और दाऊद बड़े संकट में पड़ा; क्‍योंकि लोग अपने बेटे-बेटियों के कारण बहुत शोकित होकर उस पर पत्‍थरवाह करने की चर्चा कर रहे थे। परन्‍तु दाऊद ने अपने परमेश्‍वर यहोवा को स्‍मरण करके** हियाव बान्‍धा।

7तब दाऊद ने अहीमेलेक के पुत्र एब्‍यातार याजक से कहा, “एपोद को मेरे पास ला।” तब एब्‍यातार एपोद को दाऊद के पास ले आया।

8और दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्‍या मैं इस दल का पीछा करूँ? क्‍या उसको जा पकडूँगा?” उसने उससे कहा, “पीछा कर; क्‍योंकि तू निश्‍चय उसको पकड़ेगा, और निःसन्देह सब कुछ छुड़ा लाएगा;”

9तब दाऊद अपने छ: सौ साथी जनों को लेकर बसोर नाम नाले तक पहुँचा; वहाँ कुछ लोग छोड़े जाकर रह गए।

10दाऊद तो चार सौ पुरूषों समेत पीछा किए चला गया; परन्‍तु दो सौ जो ऐसे थक गए थे, कि बसोर नाले के पार न जा सके वहीं रहे।

11उनको एक मिस्री पुरूष मैदान में मिला, उन्होंने उसे दाऊद के पास ले जाकर रोटी दी; और उसने उसे खाया, तब उसे पानी पिलाया,

12फिर उन्होंने उसको अंजीर की टिकिया का एक टुकड़ा और दो गुच्‍छे किशमिश दिए। और जब उसने खाया, तब उसके जी में जी आया; उसने तीन दिन और तीन रात से न तो रोटी खाई थी और न पानी पिया था।

13तब दाऊद ने उससे पूछा, “तू किस का जन है? और कहाँ का है?” उसने कहा, “मैं ता मिस्री जवान और एक अमालेकी मनुष्‍य का दास हूँ; और तीन दिन हुए कि मैं बीमार पड़ा, और मेरा स्‍वामी मुझे छोड़ गया।

14हम लोगों ने करेतियों की दक्षिण दिशा में, और यहूदा के देश में, और कालेब की दक्षिण दिशा में चढाई की; और सिकलग को आग लगाकर फूंक दिया था।”

15दाऊद ने उससे पूछा, “क्‍या तू मुझे उस दल के पास पहुँचा देगा?” उसने कहा, “मुझ से परमेश्‍वर की यह शपथ खा, कि मैं तुझे न तो प्राण से मारूँगा, और न तेरे स्‍वामी के हाथ कर दूँगा, तब मैं तुझे उस दल के पास पहुँचा दूँगा।”

16जब उसने उसे पहुँचाया, तब देखने में आया कि वे सब भूमि पर छिटके हुए खाते पीते, और उस बडी लूट के कारण, जो वे पलिश्‍तियों के देश और यहूदा देश से लाए थे, नाच रहे हैं।

17इसलिये दाऊद उन्‍हें रात के पहले पहर से लेकर दूसरे दिन की सांझ तक मारता रहा; यहाँ तक कि चार सौ जवान को छोड़, जो ऊँटों पर चढ़कर भाग गए, उन में से एक भी मनुष्‍य न बचा।

18और जो कुछ अमालेकी ले गए थे वह सब दाऊद ने छुड़ाया; और दाऊद ने अपनी दोनों स्‍त्रियों को भी छुडा लिया।

19वरन उनके क्‍या छ़ोटे, क्‍या बडे़,क्‍या बेटे, क्‍या बेटियाँ, क्‍या लूट का माल, सब कुछ जो अमालेकी ले गए थे, उसमें से कोई वस्‍तु न रही जो उनको न मिली हो; क्‍योंकि दाऊद सब का सब लौटा लाया।

20और दाऊद ने सब भेड़- बकरियाँ, और गाय-बैल भी लूट लिए; और इन्‍हें लोग यह कहते हुए अपने जानवरों के आगे हाँकते गए, कि यह दाऊद की लूट है।

21तब दाऊद उन दो सौ पुरुषों के पास आया, जो ऐसे थक गए थे कि दाऊद के पीछे पीछे न जा सके थे, और बसोर नाले के पास छोड़ दिए गए थे; और वे दाऊद से और उसके संग के लोगों से मिलने को चले; और दाऊद ने उनके पास पहुँचकर उनका कुशल क्षेम पूछा।

22तब उन लोगों में से जो दाऊद के संग गए थे सब दुष्‍ट और ओछे लोगों ने कहा, “ये लोग हमारे साथ नही चले थे, इस कारण हम उन्‍हें अपने छुडाए हुए लूट के माल में से कुछ न देंगे, केवल एक एक मनुष्‍य को उसकी स्‍त्री और बाल बच्‍चे देंगे, कि वे उन्‍हें लेकर चले जाएँ।”

23परन्‍तु दाऊद ने कहा, “हे मेरे भाइयो, तुम उस माल के साथ ऐसा न करने पाओगे जिसे यहोवा ने हमें दिया है; और उसने हमारी रक्षा की, और उस दल को जिस ने हमारे ऊपर चढाई की थी हमारे हाथ में कर दिया है।

24और इस विषय में तुम्‍हारी कौन सुनेगा? लड़ाई में जानेवाले का जैसा भाग हो, सामान के पास बैठे हुए का भी वैसा ही भाग होगा; दोनों एक ही समान भाग पाएँगे।”

25और दाऊद ने इस्राएलियों के लिये ऐसी ही विधि और नियम ठहराया, और वह उस दिन से लेकर आगे को वरन आज लों बना है।

26सिकलग में पहुँचकर दाऊद ने यहूदी पुरनियों के पास जो उसके मित्र थे लूट के माल में से कुछ कुछ भेजा, और यह कहलाया, “यहोवा के शत्रुओं से ली हुई लूट में से तुम्‍हारे लिये यह भेंट है।”

27अर्थात् बेतेल के दक्षिण देश के रामोत,यत्तीर,

28अरोएर, सिपमोत, एश्‍तमो,

29राकाल, यरहमेलियों के नगरों, केनियों के नगरों,

30होर्मा, कोराशान, अताक,

31हेब्रोन आदि जितने स्‍थानों में दाऊद अपने जनों समेत फिरा करता था, उन सब के पुरनियों के पास उसने कुछ कुछ भेजा।


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