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1तब शमूएल ने सारे इस्राएलियों से कहा, “सुनो, जो कुछ तुम ने मुझ से कहा था उसे मानकर मैं ने एक राजा तुम्‍हारे ऊपर ठहराया है।

2और अब देखो, वह राजा तुम्‍हारे आगे आगे चलता है; और अब मैं बूढ़ा हूँ, और मेरे बाल उजले हो गए हैं, और मेरे पुत्र तुम्‍हारे पास हैं; और मैं लड़कपन से लेकर आज तक तुम्‍हारे सामने काम करता रहा हूँ।

3मैं उपस्‍थित हूँ; इसलिये तुम यहोवा के सामने, और उसके अभिषिक्‍त के सामने मुझ पर साक्षी दो, कि मैं ने किस का बैल ले लिया? वा किस का गदहा ले लिया? वा किस पर अन्‍धेर किया? वा किस को पीसा? वा किस के हाथ से अपनी आँखे बन्‍द करने के लिये घूस लिया? बताओ, और मैं वह तुम को फेर दूँगा?”(प्रेरितों 20:33)

4वे बोले, “तू ने न तो हम पर अन्‍धेर किया, न हमें पीसा, और न किसी के हाथ से कुछ लिया है।”

5उसने उन से कहा, “आज के दिन यहोवा तुम्‍हारा साक्षी, और उसका अभिषिक्‍त इस बात का साक्षी है, कि मेरे यहाँ कुछ नहीं निकला।” वे बोले, “हाँ, वह साक्षी है।”

6फिर शमूएल लोगों से कहने लगा, “जो मूसा और हारून को ठहराकर तुम्‍हारे पूर्वजों को मिस्र देश से निकाल लाया वह यहोवा ही है।

7इसलिये अब तुम खड़े रहो, और मैं यहोवा के सामने उसके सब धर्म के कामों के विषय में, जिन्‍हें उसने तुम्‍हारे साथ और तुम्‍हारे पूर्वजों के साथ किया है, तुम्‍हारे साथ विचार करूँगा।

8याकूब मिस्र में गया, और तुम्‍हारे पूर्वजों ने यहोवा की दोहाई दी; तब यहोवा ने मूसा और हारून को भेजा, और उन्होंने तुम्‍हारे पूर्वजों को मिस्र से निकाला, और इस स्‍थान में बसाया।

9फिर जब वे अपने परमेश्‍वर यहोवा को भूल गए, तब उसने उन्‍हें हासोर के सेनापति सीसरा, और पलिश्‍तियों और मोआब के राजा के अधीन कर दिया; और वे उन से लड़े।

10तब उन्होंने यहोवा की दोहाई देकर कहा, ‘हम ने यहोवा को त्‍यागकर और बाल देवताओं और आश्तोरेत देवियों की उपासना करके महा पाप किया है; परन्‍तु अब तू हम को हमारे शत्रुओं के हाथ से छुड़ा तो हम तेरी उपासना करेंगे।’

11इसलिये यहोवा ने यरूब्‍बाल, बदान, यिप्‍तह, और शमूएल को भेजकर तुम को तुम्‍हारे चारों ओर के शत्रुओं के हाथ से छुड़ाया; और तुम निडर रहने लगे।

12और जब तुम ने देखा कि अम्‍मोनियों का राजा नाहाश हम पर चढ़ाई करता है, तब यधपी तुम्‍हारा परमेश्‍वर यहोवा तुम्‍हारा राजा था तौभी तुम ने मुझ से कहा, ‘नहीं, हम पर एक राजा राज्‍य करेगा।’

13अब उस राजा को देखो जिसे तुम ने चुन लिया, और जिसके लिये तुम ने प्रार्थना की थी; देखो, यहोवा ने एक राजा तुम्‍हारे ऊपर नियुक्‍त कर दिया है।

14यदि तुम यहोवा का भय मानते, उसकी उपासना करते, और उसकी बात सुनते रहो, और यहोवा की आज्ञा को टालकर उससे बलवा न करो, और तुम और वह जो तुम पर राजा हुआ है दोनो अपने परमेश्‍वर यहोवा के पीछे पीछे चलनेवाले बने रहो, तब तो भला होगा;

15परन्‍तु यदि तुम यहोवा की बात न मानो, और यहोवा की आज्ञा को टालकर उससे बलवा करो, तो यहोवा का हाथ जैसे तुम्‍हारे पुरखाओं के विरूद्ध हुआ वैसे ही तुम्‍हारे भी विरूद्ध उठेगा।

16इसलिये अब तुम खड़े रहो, और इस बड़े काम को देखो जिसे यहोवा तुम्‍हारे आँखों के सामने करने पर है।

17आज क्‍या गेहूँ की कटनी नहीं हो रही? मैं यहोवा को पुकारूँगा, और वह मेघ गरजाएगा और मेंह बरसाएगा; तब तुम जान लोगे, और देख भी लोगे, कि तुम ने राजा माँगकर यहोवा की दृष्टि में बहुत बड़ी बुराई की है।”

18तब शमूएल ने यहोवा का पुकारा, और यहोवा ने उसी दिन मेघ गरजाया और मेंह बरसाया; और सब लोग यहोवा से और शमूएल से अत्‍यन्‍त डर गए।

19और सब लोगों ने शमूएल से कहा, “अपने दासों के निमित्त अपने परमेश्‍वर यहोवा से प्रार्थना कर, कि हम मर न जाएँ; क्‍योंकि हम ने अपने सारे पापों से बढ़कर यह बुराई की है कि राजा माँगा है।”

20शमूएल ने लोगों से कहा, “डरो मत; तुम ने यह सब बुराई तो की है, परन्‍तु अब यहोवा के पीछे चलने से फिर मत मुड़ना; परन्‍तु अपने सम्‍पूर्ण मन से उसकी उपासना करना;

21और मत मुड़ना; नहीं तो ऐसी व्‍यर्थ वस्‍तुओं के पीछे चलने लगोगे जिन से न कुछ लाभ पहुँचेगा, और न कुछ छुटकारा हो सकता है, क्‍योंकि वे सब व्‍यर्थ ही हैं।

22यहोवा तो अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को न तजेगा, क्‍योंकि यहोवा ने तुम्‍हे अपनी ही इच्‍छा से अपनी प्रजा बनाया है।(रोमियो 11:1,2)

23फिर यह मुझ से दूर हो कि मैं तुम्‍हारे लिये प्रार्थना करना छोड़कर यहोवा के विरूद्ध पापी ठहरूं; मैं तो तुम्‍हें अच्‍छा और सीधा मार्ग दिखाता रहूँगा।

24केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्‍चाई से अपने सम्‍पूर्ण मन के साथ उसकी उपासना करो; क्‍योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्‍हारे लिये कैसे बड़े बड़े काम किए हैं।

25परन्‍तु यदि तुम बुराई करते ही रहोगे, तो तुम और तुम्‍हारा राजा दोनों के दोनों मिट जाओगे।”


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