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1जब दाऊद के मरने का समय निकट आया, तब उसने अपने पुत्र सुलैमान से कहा,

2“मैं संसार की रीति पर कूच करनेवाला हूँ इसलिये तू हियाव बाँधकर पुरुषार्थ दिखा।

3और जो कुछ तेरे परमेश्‍वर यहोवा ने तुझे सौंपा है, उसकी रक्षा करके उसके मार्गों पर चला करना और जैसा मूसा की व्‍यवस्‍था में लिखा है, वैसा ही उसकी विधियों तथा आज्ञाओं, और नियमों, और चितौनियों का पालन करते रहना; जिस से जो कुछ तू करे और जहाँ कहीं तू जाए, उस में तू सफल होए;

4और यहोवा अपना वह वचन पूरा करे जो उसने मेरे विषय में कहा था, ‘यदि तेरी सन्‍तान अपनी चाल के विषय में ऐसे सावधान रहें, कि अपने सम्‍पूर्ण हृदय और सम्‍पूर्ण प्राण से सच्‍चाई के साथ नित मेरे सम्‍मुख चलते रहें तब तो इस्राएल की राजगद्दी पर विराजनेवाले की, तेरे कुल परिवार में घटी कभी न होगी।’

5“फिर तू स्‍वयं जानता है, कि सरूयाह के पुत्र योआब ने मुझ से क्‍या क्‍या किया ! अर्थात् उसने नेर के पुत्र अब्‍नेर, और येतेर के पुत्र अमासा, इस्राएल के इन दो सेनापतियों से क्‍या क्‍या किया। उसने उन दोनों को घात किया, और मेल के समय युद्ध का लहू बहाकर उस से अपनी कमर का कमरबन्‍द और अपने पाँवो की जूतियाँ भिगो दीं।

6इसलिये तू अपनी बुद्धि से काम लेना और उस पक्‍के बालवाले को अधोलोक में शांति से उतरने न देना।

7फिर गिलादी बर्जिल्‍लै के पुत्रों पर कृपा रखना, और वे तेरी मेज पर खानेवालों में रहें, क्‍योंकि जब मैं तेरे भाई अबशालोम के सामने से भागा जा रहा था, तब उन्‍हों ने मेरे पास आकर वैसा ही किया था।

8फिर सुन, तेरे पास बिन्‍यामीनी गेरा का पुत्र बहूरीमी शिमी रहता है, जिस दिन मैं महनैम को जाता था उस दिन उसने मुझे कड़ाई से शाप दिया था पर जब वह मेरी भेंट के लिये यरदन को आया, तब मैं ने उस से यहोवा की यह शपथ खाई, कि मैं तुझे तलवार से न मार डालूँगा।

9परन्‍तु अब तू इसे निर्दोष न ठहराना, तू तो बुद्धिमान पुरुष है; तुझे मालूम होगा कि उसके साथ क्‍या करना चाहिये, और उस पक्‍के बालवाले का लहू बहाकर उसे अधोलोक में उतार देना।”

10तब दाऊद अपने पुरखाओं के संग सो गया और दाऊदपुर में उसे मिट्टी दी गई।

11दाऊद ने इस्राएल पर चालीस वर्ष राज्‍य किया, सात वर्ष तो उसने हेब्रोन में और तैंतीस वर्ष यरूशलेम में राज्‍य किया था।

12तब सुलैमान अपने पिता दाऊद की गद्दी पर विराजमान हुआ और उसका राज्‍य बहुत दृढ़ हुआ।

13और हग्‍गीत का पुत्र अदोनिय्‍याह, सुलैमान की माता बतशेबा के पास आया, और बतशेबा ने पूछा, “क्‍या तू मित्रभाव से आता है?”

14उसने उत्‍तर दिया, “हाँ, मित्रभाव से !” फिर वह कहने लगा, “मुझे तुझ से एक बात कहनी है।” उसने कहा, “कह !”

15उसने कहा, “तुझे तो मालूम है कि राज्‍य मेरा हो गया था, और समस्‍त इस्राएली मेरी ओर मुँह किए थे, कि मैं राज्‍य करूँ; परन्‍तु अब राज्‍य पलटकर मेरे भाई का हो गया है, क्‍योंकि वह यहोवा की ओर से उसको मिला है।

16इसलिये अब मैं तुझ से एक बात माँगता हूँ, मुझ को मना न करना।” उसने कहा, “कहे जा।”

17उसने कहा, “राजा सुलैमान तुझ से नाही न करेगा; इसलिये उस से कह, कि वह मुझे शूनेमिन अबीशग को ब्‍याह दे।”

18बतशेबा ने कहा, “अच्‍छा, मैं तेरे लिये राजा से कहूँगी।”

19तब बतशेबा अदोनिय्‍याह के लिये राजा सुलैमान से बातचीत करने को उसके पास गई, और राजा उसकी भेंट के लिये उठा, और उसे दण्डवत् करके अपने सिंहासन पर बैठ गयाः फिर राजा ने अपनी माता के लिये एक सिंहासन रख दिया, और वह उसकी दाहिनी ओर बैठ गई।

20तब वह कहने लगी, “मैं तुझ से एक छोटा सा वरदान माँगती हूँ इसलिये मुझ को मना न करना,” राजा ने कहा, “हे माता माँग; मैं तुझ से नाही न करूँगा।”

21उसने कहा, “वह शूनेमिन अबीशग तेरे भाई अदोनिय्‍याह को ब्‍याह दी जाए।”

22राजा सुलैमान ने अपनी माता को उत्‍तर दिया, “तू अदोनिय्‍याह के लिये शूनेमिन अबीशग ही को क्‍यो माँगती है? उसके लिये राज्‍य भी माँग, क्‍योंकि वह तो मेरा बड़ा भाई है, और उसी के लिये क्‍या ! एब्‍यातार याजक और सरूयाह के पुत्र योआब के लिये भी माँग।”

23और राजा सुलैमान ने यहोवा की शपथ खाकर कहा, “यदि अदोनिय्‍याह ने यह बात अपने प्राण पर खेलकर न कही हो तो परमेश्‍वर मुझ से वैसा ही क्‍या वरन उस से भी अधिक करे।

24अब यहोवा जिस ने मुझे स्‍थिर किया, और मेरे पिता दाऊद की राजगद्दी पर विराजमान किया है और अपने वचन के अनुसार मेरा घर बसाया है, उसके जीवन की शपथ आज ही अदोनिय्‍याह मार डाला जाएगा।”

25और राजा सुलैमान ने यहोयादा के पुत्र बनायाह को भेज दिया और उसने जाकर, उसको ऐसा मारा कि वह मर गया।

26और एब्‍यातार याजक से राजा ने कहा, “अनातोत में अपनी भूमि को जा; क्‍योंकि तू भी प्राणदण्ड के योग्‍य है। आज के दिन तो मैं तुझे न मार डालूँगा, क्‍योंकि तू मेरे पिता दाऊद के सामने प्रभु यहोवा का सन्‍दूक उठाया करता था; और उन सब दुःखों में जो मेरे पिता पर पड़े थे तू भी दुःखी था।”

27और सुलैमान ने एब्‍यातार को यहोवा के याजक होने के पद से उतार दिया, इसलिये कि जो वचन यहोवा ने एली के वंश के विषय में शीलो में कहा था, वह पूरा हो जाए।

28इसका समाचार योआब तक पहुँचा; योआब अबशालोम के पीछे तो नहीं हो लिया था, परन्‍तु अदोनिय्‍याह के पीछे हो लिया था। तब योआब यहोवा के तम्‍बू को भाग गया, और वेदी के सींगों को पकड़ लिया।

29जब राजा सुलैमान को यह समाचार मिला, “योआब यहोवा के तम्‍बू को भाग गया है, और वह वेदी के पास है,” तब सुलैमान ने यहोयादा के पुत्र बनायाह को यह कहकर भेज दिया, कि तू जाकर उसे मार डाल।

30तब बनायाह ने यहोवा के तम्‍बू के पास जाकर उससे कहा, “राजा की यह आज्ञा है, कि निकल आ।” उसने कहा, “नहीं, मैं यहीं मर जाऊँगा।” तब बनायाह ने लौटकर यह सन्‍देश राजा को दिया “योआब ने मुझे यह उत्‍तर दिया।”

31राजा ने उस से कहा, “उसके कहने के अनुसार उसको मार डाल, और उसे मिट्टी दे; ऐसा करके निर्दोष का जो खून योआब ने किया है, उसका दोष तू मुझ पर से और मेरे पिता के घराने पर से दूर करेगा।

32और यहोवा उसके सिर वह खून लौटा देगा क्‍योंकि उसने मेरे पिता दाऊद के बिना जाने अपने से अधिक धर्मीं और भले दो पुरुषों पर, अर्थात् इस्राएल के प्रधान सेनापति नेर के पुत्र अब्‍नेर और यहूदा के प्रधान सेनापति येतेर के पुत्र अमासा पर टूटकर उनको तलवार से मार डाला था।

33यों योआब के सिर पर और उसकी सन्‍तान के सिर पर खून सदा तक रहेगा, परन्‍तु दाऊद और उसके वंश और उसके घराने और उसके राज्‍य पर यहोवा की ओर से शांति सदैव तक रहेगी।”

34तब यहोयादा के पुत्र बनायाह ने जाकर योआब को मार डाला; और उसको जंगल में उसी के घर में मिट्टी दी गई।

35तब राजा ने उसके स्‍थान पर यहोयादा के पुत्र बनायाह को प्रधान सेनापति ठहराया; और एब्‍यातार के स्‍थान पर सादोक याजक को ठहराया।

36और राजा ने शिमी को बुलवा भेजा, और उस से कहा, “तू यरूशलेम में अपना एक घर बनाकर वहीं रहनाः और नगर से बाहर कहीं न जाना।

37तू निश्‍चय जान रख कि जिस दिन तू निकलकर किद्रोन नाले के पार उतरे, उसी दिन तू निःसन्‍देह मार डाला जाएगा, और तेरा लहू तेरे ही सिर पर पड़ेगा।”

38शिमी ने राजा से कहा, “बात अच्‍छी है; जैसा मेरे प्रभु राजा ने कहा है, वैसा ही तेरा दास करेगा।” तब शिमी बहुत दिन यरूशलेम में रहा।

39परन्‍तु तीन वर्ष के व्‍यतीत होने पर शिमी के दो दास, गत नगर के राजा माका के पुत्र आकीश के पास भाग गए, और शिमी को यह समाचार मिला, “तेरे दास गत में हैं।”

40तब शिमी उठकर अपने गदहे पर काठी कसकर, अपने दास को ढूंढ़ने के लिये गत को आकीश के पास गया, और अपने दासों को गत से ले आया।

41जब सुलैमान राजा को इसका समाचार मिला, “शिमी यरूशलेम से गत को गया, और फिर लौट आया है,”

42तब उसने शिमी को बुलवा भेजा, और उस से कहा, “क्‍या मैं ने तुझे यहोवा की शपथ न खिलाई थी? और तुझ से चिताकर न कहा था, ‘यह निश्‍चय जान रख कि जिस दिन तू निकलकर कहीं चला जाए, उसी दिन तू निःसन्‍देह मार डाला जाएगा?’ और क्‍या तू ने मुझ से न कहा था, ‘जो बात मैं ने सुनी, वह अच्‍छी है?’

43फिर तू ने यहोवा की शपथ और मेरी दृढ़ आज्ञा क्‍यों नहीं मानी?”

44और राजा ने शिमी से कहा, “तू आप ही अपने मन में उस सब दुष्‍टता को जानता है, जो तू ने मेरे पिता दाऊद से की थी? इसलिये यहोवा तेरे सिर पर तेरी दुष्‍टता लौटा देगा।

45परन्‍तु राजा सुलैमान धन्‍य रहेगा, और दाऊद का राज्‍य यहोवा के सामने सदैव दृढ़ रहेगा।”

46तब राजा ने यहोयादा के पुत्र बनायाह को आज्ञा दी, और उसने बाहर जाकर, उसको ऐसा मारा कि वह भी मर गया। और सुलैमान के हाथ मे राज्‍य दृढ़ हो गया।


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