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1उस समय यारोबाम का बेटा अबिय्‍याह रोगी हुआ।

2तब यारोबाम ने अपनी स्‍त्री से कहा, “ऐसा भेष बना कि कोई तुझे पहिचान न सके कि यह यारोबाम की स्‍त्री है, और शीलो को चली जा, वहाँ तो अहिय्‍याह नबी रहता है जिस ने मुझ से कहा था ‘तू इस प्रजा का राजा हो जाएगा।’

3उसके पास तू दस रोटी, और टिकियाँ और एक कुप्‍पी मधु लिये हुए जा, और वह तुझे बताएगा कि लड़के को क्‍या होगा।”

4यारोबाम की स्‍त्री ने वैसा ही किया, और चलकर शीलो को पहुँची और अहिय्‍याह के घर पर आई: अहिय्‍याह को तो कुछ सूझ न पड़ता था, क्‍योंकि बुढ़ापे के कारण उसकी आँखें धुन्‍धली पड़ गई थीं।

5और यहोवा ने अहिय्‍याह से कहा, “सुन यारोबाम की स्‍त्री तुझ से अपने बेटे के विषय में जो रोगी है कुछ पूछने को आती है, तू उस से ये ये बातें कहना; वह तो आकर अपने को दूसरी औरत बनाएगी।”

6जब अहिय्‍याह ने द्वार में आते हुए उसके पाँव की आहट सुनी तब कहा, “हे यारोबाम की स्‍त्री ! भीतर आ; तू अपने को क्‍यों दूसरी स्‍त्री बनाती है? मुझे तेरे लिये भारी सन्‍देश मिला है।

7तू जाकर यारोबाम से कह कि इस्राएल का परमेश्‍वर यहोवा तुझ से यों कहता है, ‘मैं ने तो तुझ को प्रजा में से बढ़ाकर अपनी प्रजा इस्राएल पर प्रधान किया,

8और दाऊद के घराने से राज्‍य छीनकर तुझ को दिया, परन्‍तु तू मेरे दास दाऊद के समान न हुआ जो मेरी आज्ञाओं को मानता, और अपने पूर्ण मन से मेरे पीछे पीछे चलता, और केवल वही करता था जो मेरी दृष्‍टि में ठीक है।

9तू ने उन सभों से बढ़कर जो तुझ से पहिले थे बुराई, की है, और जाकर पराये देवता की उपासना की और मूरतें ढालकर बनाई, जिस से मुझे क्रोधित कर दिया और मुझे तो पीठ के पीछे फेंक दिया है।

10इस कारण मैं यारोबाम के घराने पर विपत्‍ति डालूँगा, वरन मैं यारोबाम के कुल में से हर एक लड़के को और क्‍या बन्‍धुए, क्‍या स्‍वाधीन इस्राएल के मध्‍य हर एक रहनेवाले को भी नष्‍ट कर डालूँगा: और जैसा कोई गोबर को तब तक उठाता रहता है जब तक वह सब उठा नहीं लिया जाता, वैसे ही मैं यारोबाम के घराने की सफाई कर दूँगा।

11यारोबाम के घराने का जो कोई नगर में मर जाए, उसको कुत्‍ते खाएँगे; और जो मैदान में मरे, उसको आकाश के पक्षी खा जाएँगे; क्‍योंकि यहोवा ने यह कहा है ।’

12इसलिये तू उठ और अपने घर जा, और नगर के भीतर तेरे पाँव पड़ते ही वह बालक मर जाएगा।

13उसे तो समस्‍त इस्राएली छाती पीटकर मिट्टी देंगे; यारोबाम के सन्‍तानों में से केवल उसी को कबर मिलेगी, क्‍योंकि यारोबाम के घराने में से उसी में कुछ पाया जाता है जो यहोवा इस्राएल के प्रभु की दष्‍टि में भला है।

14फिर यहोवा इस्राएल के लिये एक ऐसा राजा खड़ा करेगा जो उसी दिन यारोबाम के घराने को नाश कर डालेगा, परन्‍तु कब? यह अभी होगा।

15क्‍योंकि यहोवा इस्राएल को ऐसा मारेगा, जैसा जल की धारा से नरकट हिलाया जाता है, और वह उनको इस अच्‍छी भूमि में से जो उसने उनके पुरखाओं को दी थी उखाड़कर महानद के पार तित्‍तर-बित्‍तर करेगा; क्‍योंकि उन्‍हों ने अशेरा नाम मूरतें अपने लिये बनाकर यहोवा को क्रोध दिलाया है।

16और उन पापों के कारण जो यारोबाम ने किए और इस्राएल से कराए थे, यहोवा इस्राएल को त्‍याग देगा।”

17तब यारोबाम की स्‍त्र विदा होकर चली और तिरज़ा को आई, और वह भवन की डेवढ़ी पर जैसे ही पहुँची कि वह बालक मर गया।

18तब यहोवा के वचन के अनुसार जो उसने अपने दास अहिय्‍याह नबी से कहलाया था, समस्‍त इस्राएल ने उसको मिट्टी देकर उसके लिये शोक मनाया।

19यारोबाम के और काम अर्थात् उसने कैसा कैसा युद्ध किया, और कैसा राज्‍य किया, यह सब इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्‍तक में लिखा है।

20यारोबाम बाईस वर्ष तक राज्‍य करके अपने पुरखाओं के साथ सो गया और नादाब नाम उसका पुत्र उसके स्‍थान पर राजा हुआ।

21और सुलैमान का पुत्र रहूबियाम यहूदा में राज्‍य करने लगा। रहूबियाम इकतालीस वर्ष का होकर राज्‍य करने लगा; और यरूशलेम जिसको यहोवा ने सारे इस्राएली गोत्रों में से अपना नाम रखने के लिये चुन लिया था, उस नगर में वह सत्रह वर्ष तक राज्‍य करता रहा; और उसकी माता का नाम नामाह था जो अम्‍मोनी स्‍त्री थी।

22और यहूदी लोग वह करने लगे जो यहोवा की दृष्‍टि में बुरा है, और अपने पुरखाओं से भी अधिक पाप करके उसकी जलन भड़काई।

23उन्‍हों ने तो सब ऊँचे टीलों पर, और सब हरे वृक्षों के तले, ऊँचे स्‍थान, और लाठें, और अशेरा नाम मूरतें बना लीं ।

24और उनके देश में पुरुषगामी भी थे; निदान वे उन जातियों के से सब घिनौने काम करते थे जिन्‍हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से निकाल दिया था।

25राजा रहूबियाम के पाँचवें वर्ष में मिस्र का राजा शीशक, यरूशलेम पर चढ़ाई करके,

26यहोवा के भवन की अनमोल वस्‍तुएँ और राजभवन की अनमोल वस्‍तुएँ, सब की सब उठा ले गया; और सोने की जो ढालें सुलैमान ने बनाई थी सब को वह ले गया।

27इसलिये राजा रहूबियाम ने उनके बदले पीतल की ढालें बनवाई और उन्‍हें पहरुओं के प्रधानों के हाथ सौंप दिया जो राजभवन के द्वार की रखवाली करते थे।

28और जब जब राजा यहोवा के भवन में जाता था तब तब पहरुए उन्‍हें उठा ले चलते, और फिर अपनी कोठरी में लौटाकर रख देते थे।

29रहूबियाम के और सब काम जो उसने किए वह क्‍या यहूदा के राजाओ के इतिहास की पुस्‍तक में नहीं लिखे हैं?

30रहूबियाम और यारोबाम में तो सदा लड़ाई होती रही।

31और रहूबियाम जिसकी माता नामाह नाम एक अम्‍मोनिन थी, अपने पुरखाओं के साथ सो गया; और उन्‍हीं के पास दाऊदपुर में उसको मिट्टी दी गई: और उसका पुत्र अबिय्‍याम उसके स्‍थान पर राज्‍य करने लगा।


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